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क्लास वन की हिंदी कविता में ‘छोकरी‘ शब्द के इस्तेमाल पर बवाल, पढ़िए NCERT ने क्या दी सफाई

Ranchi : पिछले दो दिन से एनसीईआरटी सोशल मीडिया में छाया हुआ है. वजह है उसके द्वारा पढाई जा रही हिंदी कविता ‘आम की टोकरी’. यह कविता क्लास वन के हिंदी की किताब में है. सोशल मीडिया में इस कविता को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है.

ट्विटर पर इसे काफी ट्रेंड किया जा रहा है. दरअसल इस कविता में ‘छोकरी‘ शब्द का इस्तेमाल किया गया है जिसपर लोग आपत्ति दर्ज कर रहे हैं. सोशल मीडिया में चल रही बहस के बीच एनसीईआरटी ने अपनी सफाई दी है.

क्या है पूरा मामला

एनसीईआरटी की क्लास एक में पढ़ाई जा रही ‘आम की टोकरी’ शीर्षक वाली कविता पर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है. क्लास वन की रिमझिम नाम की किताब में शामिल यह कविता आम की टोकरी ले जाती बच्ची पर है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस कविता के शब्दों पर ऐतराज जता रहे हैं.

किताब में छपी कविता में 6 साल की बच्ची को ‘छोकरी‘ कहा गया है. यह कविता पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाई जा रही है. सोशल मीडिया पर एक धड़ा इस कविता को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इस कविता का समर्थन कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस कविता में कुछ भी गलत नहीं है.

2006 से सिलेबस का हिस्सा

रिमझिम नाम की इस किताब ने शामिल कविता रामकृष्ण शर्मा खद्दर ने लिखी है. इसे एनसीईआरटी के कक्षा एक के सिलेबस में रखा है. यह कविता कक्षा पहली के बच्चे 2006 से लगातार पढ़ रहे हैं. लेकिन बताते हैं कि आज ट्विटर पर सबसे पहले इस कविता को छत्तीसगढ़ कैडर के आइएएस ने ट्वीट कर आपत्ति जताई थी. इसके बाद कई यूजर्स ने भी इसे पाठ्यक्रम से हटाने को लेकर प्रतिक्रियाएं दी हैं.

छत्तीसगढ़ कैडर के 2009 बैच के आईएएस अधिकारी अवनीश शरण ने इस कविता को अपने ट्विटर अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा है.. ये किस सड़क छाप कवि की रचना है?? कृपया इस पाठ को पाठ्यपुस्तक से बाहर करें.

एनसीईआरटी ने क्या कहा है

सोशल मीडिया में चल रहे इस कविता को लेकर एनसीईआरटी ने अपना पक्ष रखा है. उसने ट्वीट कर कहा है कि नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के अनुसार इस कविता को शामिल किया गया है. जिसका मकसद स्थानीय भाषाओं की शब्दावली को बच्चों तक पहुंचाना है. ताकि बच्चों को सीखना रुचिकर लगे.

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