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धर्मकोड के मुद्दे पर आदिवासी संगठनों का आपसी मतभेद गहराया

एक गुट सरना धर्मकोड मांग रहा, दूसरा कर रहा आदि धर्म की वकालत

Ranchi : धर्मकोड के मुद्दे पर राज्य के आदिवासी संगठन आमने-सामने हैं. ये संगठन पहले अलग-अलग धर्मकोड की मांग कर रहे हैं. डॉक्टर करमा उरांव और धर्म गुरु बंधन तिग्गा के नेतृत्व में एक गुट सरना कोड की मांग कर रहा है. वहीं पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक देव कुमार धान के नेतृत्व में दूसरा गुट आदि धर्म की वकालत कर रहा है. पहले एक दूसरे की मांग पर कोई हस्तक्षेप नहीं था. मांगों के समर्थन में अपने-अपने दावे और तर्क थे. पर अब खुलकर एक दूसरे के विरोध में दोनों गुट खड़े हो गए हैं.

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 क्यों आई यह स्थिति

दरअसल पिछले दिनों हेमंत सरकार ने घोषणा की कि वह 15 नवंबर से पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरना कोड के संबंध में संकल्प पारित कर केंद्र को भेजेगी. इस पर आदिवासी धर्म कोड की मांग कर रहे संगठन बैकफुट पर आ गए थे. इसके बाद गीताश्री उरांव, देव कुमार धान सहित अन्य नेताओं ने विधायक क्लब सभागार में 32 आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों की बैठक में सरना कोड की मांग को खारिज किया. इस दौरान कहा गया कि जब 2015 में ही केंद्र सरकार ने सरना कोड की मांग को खारिज कर दिया है फिर भी सरना कोड की मांग करना समुदाय को बेवकूफ बनाना है.

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यह साजिश के तहत हो रहा है.

इसके बाद डॉक्टर करमा करमा उरांव और धर्म गुरु बंधन तिग्गा ने पलटवार करते हुए कहा कि सरना कोड की मांग खारिज करना लाखों सरना धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाओं पर हस्तक्षेप करने के जैसा है. डॉक्टर करमा उरांव ने कहा की यह साजिश के तहत हो रहा है. उन्होंने कहा कि 2011 में जनगणना के दौरान झारखंड सहित देश के अलग-अलग राज्यों के 49.57 लाख लोगों ने  अन्य धर्म के कॉलम में सरना दर्ज कराया था. जबकि आदिवासी धर्म की मांग करने वालों की संख्या 86. 87 हजार है. यह भी कहा गया कि सरना धर्म का विरोध करने वाले देव कुमार धान, गीताश्री उरांव, प्रेमशाही मुंडा सहित अन्य के खिलाफ निर्णय लिया जाएगा.

दोनों गुटों की अपनी-अपनी रणनीति

7 नवंबर को हरमू स्थित देशावली में सरना कोड के समर्थन में एक बार फिर बैठक होगी. वही आदिवासी धर्म के समर्थन में भी 5 नवंबर से 14 नवंबर तक सभी जिलों में धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की बात कही गई है. इसके अलावा 2021 के फरवरी में आदिवासी धर्म कोड महारैली के आयोजन की बात कही गई है.

इन सबके बीच अब धर्मकोड के मुद्दे पर राज्य सरकार के कदम पर भी लोगों की निगाहें होंगी. बड़ा सवाल यह है कि सरकार सरना कोड को लेकर अपने पूर्व की घोषणा पर कायम रहेगी या फिर आदिवासी धर्म कोड की मांग पर आगे बढ़ेगी. पर जो आम आदिवासी है वह इतना समझना चाहते हैं कि उन्हें अपना अलग धर्म कोड मिलेगा या नहीं.

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