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देश की बर्बाद होती हुई अर्थव्यवस्था का आइना है बैंको द्वारा राइट ऑफ की गयी रकम में बढ़ोतरी

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Girish Malviya

आइये देखते है कि पिछले 6 सालो में बैंको ने जो रकम राइट ऑफ की है यानी बट्टे खाते में डाली है उसमे उत्तररोत्तर कितनी वृद्धि हुई है. आपको जानकर बेहद आष्चर्य होगा कि CNN-News 18 को आरबीआइ से RTI के जरिये जो बैंकों का डाटा मिला है, उसमें पता लगा है कि 2018 -19 में सभी कमर्शियल बैंकों द्वारा 100 करोड़ रुपये व उससे अधिक के बैड लोन का कुल 2.75 लाख करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाल दिया गया है. यानी राइट ऑफ कर दिया गया है.

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मात्र 1 साल में 2.75 लाख करोड़ रुपये can you belive it !

अब आप देखिए कि सरकारी बैंको ने पिछले 6 साल में कितने बैड लोन को राइट ऑफ किया था-

Whmart 3/3 – 2/4
  • 2013-14 में 34,409 करोड़ रुपये.
  • 2014-15 में 49,018 करोड़ रुपये.
  • 2015-16 में 57,585 करोड़ रुपये.
  • 2016-17 में 1,08,374 करोड़ रुपये.
  • 2017-18 में 161,328 करोड़ रुपये.
  • 2018 -19 में 2.75 लाख करोड़ रुपये.

यानि 2013-14 में 34,409 करोड़ रुपये और 2018 -19 में सीधे 2.75 लाख करोड़ रुपये. क्या ये कमाल नेहरू जी ने किया है?

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देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टे खाते डाला था. और 2018 -19 में भारतीय स्टेट बैंक 76,000 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टे खाते में डाल दिया है. यानि मात्र 2 साल में यह रकम तिगुनी से भी अधिक हो गयी है.

अब भी आपको लग रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘आल इज वेल है सब बढ़िया है, सब चंगा सी, खूब भालो’ ……..तो अपने दिमाग का जाकर कहीं इलाज करा लीजिए !

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनकी निजी राय है)

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