Opinion

गुजरात में कोरोना के ज्यादा खतरनाक होने की वजह #NamasteTrump तो नहीं!

Girish Malviya

नमस्ते ट्रंप प्रोग्राम जो 23 फरवरी 2020 को गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित किया गया, यह गुजरात की आम जनता के लिए दूसरे राज्यों की तुलना में किस तरह से ज्यादा घातक सिद्ध हुआ है, यह डॉक्टरों ने खुलकर एक्सप्लेन किया है.

27 अप्रैल की सुबह तक गुजरात में कोरोना के 3301 मरीज हैं और 151 लोगों की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञों और डॉक्टर्स के अनुसार, गुजरात में मौत के बढ़ते आंकड़ों की वजह से कोरोना वायरस का L-Strain हो सकता है.

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दरअसल, कोरोना वायरस के दो अलग स्ट्रेन हैं- L स्ट्रेन और S स्ट्रेन. इनमें से L स्ट्रेन चीन के वुहान का ओरिजनल स्ट्रेन है. इस वायरस का असर बहुत घातक है और इस वजह से जल्दी मौत भी होती है. वुहान के बाद L स्ट्रेन के म्युटेशन से S स्ट्रेन बना. यह अपेक्षाकृत कम घातक है, केरल सरकार के मेडिकल सलाहकार बताते हैं कि वहां पर बाहर से आये कोरोना के ज्यादातर केस दुबई के थे.

दुबई और खाड़ी देशो में हल्का S स्ट्रेन है. इसलिए केरल में कोरोना का प्रभाव काफी हद तक कम हो गया है. केरल में मृत्यु दर कम होने के पीछे वहां पर S-Strain की मौजूदगी अहम वजह हो सकती है.

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लेकिन गुजरात में फरवरी माह में “नमस्ते ट्रंप” प्रोग्राम के तहत बड़ी संख्या में अमेरिकी और यूरोपीय देशों से आने वाले विदेशियों की आवाजाही अधिक रही थी. वहां पर L स्ट्रेन कॉमन है. इसलिए गुजरात में L स्ट्रेन का प्रभाव होने की आशंका है. और इसी कारण से आज गुजरात कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाला देश का दूसरा सबसे प्रभावित राज्य बन गया है. इसी वजह से गुजरात में मौत भी अधिक हो रही है.

खुद शहर के म्युनिसिपल कमिश्नर दावा कर चुके हैं कि मरीजों की यह स्पीड बरकरार रही तो मई के अंत तक शहर में कोविड-19 के करीब आठ लाख मरीज हो सकते हैं. वहां हर 4 दिन में मरीज दोगुने हो रहे हैं.

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डिस्क्लेमरः यह लेख गिरीश मालवीय के फेसबुक वॉल से लिया गया है.

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