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आदिवासी युवकों के फर्जी सरेंडर मामले में रवि बोदरा का सनसनीखेज खुलासा, कहा-गृह सचिव, आईजी, एसएसपी समेत कई अधिकारियों को थी जानकारी

नौकरी के नाम पर 514 आदिवासी युवकों को फर्जी सरेंडर करा कर वसूली गयी थी करोड़ों की राशि

Ranchi : झारखंड में नौकरी के नाम पर नक्सली बताकर 514 आदिवासी युवकों का फर्जी सरेंडर मामले में नया मोड़ आया है. मानवाधिकार के उल्लंघन से संबंधित इस मामले में जेल की हवा खाने वाले रवि बोदरा ने नया खुलासा किया है. बोदरा ने अदालत में हस्तक्षेप याचिका (intervener petition ) दिया है. जिसमें बताया है कि इस योजना की जानकारी उस समय राज्य में तैनात कई वरिष्ठ अधिकारियों को थी.

 

रवि बोदरा के आवेदन के अनुसार इस योजना की जानकारी किसी ने किसी रूप में झारखंड के तत्कालीन गृह सचिव जेबी तुबिद, आईजी एसएन प्रधान, आईजी (विशेष शाखा) डीके पांडेय, रांची के तत्कालीन एसएसपी साकेत कुमार सिंह, डिप्टी कमांडेंट पीआर मिश्रा समेत कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को थी. ये सभी अधिकारी बोदरा के टच में थे.

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मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार तक पहुंची थी. आयोग की जांच में पुष्टि हुई थी जिन लोगों को सरेंडर कराया गया था, वे आम लोग थे न कि नक्सली. ऐसे में आम लोगों को नक्सली बताना मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है. इस आधार पर मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार से जवाब-तलब भी किया गया था.

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क्या है मामला

 

यह पूरा मामला रांची, खूंटी, गुमला व सिमडेगा के भोले-भाले 514 युवकों को नक्सली बताकर सरेंडर कराने का है. इस मामले में एजेंट और अफसरों ने सरेंडर करनेवाले युवकों से हथियार खरीदने के नाम पर लाखों रुपये वसूले, ताकि सरेंडर के समय उन्हें वे हथियार उपलब्ध कराये जा सकें. यहां उल्लेखनीय है कि जिस वक्त 514 युवकों को कोबरा बटालियन के जवानों की निगरानी में पुरानी जेल परिसर में रखा गया था और हथियार के साथ उनकी तस्वीरें ली जा रही थीं, उस वक्त सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के आईजी डीके पांडेय हुआ करते थे. डीके पांडेय अभी राज्य के डीजीपी हैं. और इस मामले में डीजीपी डीके पांडेय, एडीजी एसएन प्रधान समेत सीआरपीएफ के अन्य अफसर संदेह के घेरे में हैं.

 

कौन है रवि बोदरा

 

रवि बोदरा मूल रूप से टेबो पश्चिमी सिंहभूम का रहने वाला है. वह इंटर पास है. यह पुलिस के लिए काम करता था. कई आईपीएस अधिकारियों से इसके संबंध रहे हैं. माना जाता है कि इन्हीं संबंधों को ध्यान रखकर इसे आदिवासी युवकों को बरलगाकर लाने व उससे वसूली की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी.

 

ये लोग खा चुके हैं जेल की हवा

 

दिग्दर्शन कोचिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर दिनेश प्रजापति (सिल्ली, रांची निवासी), टेबो पश्चिमी सिंहभूम के निवासी रवि बोदरा, खूंटी के रनिया निवासी वैशाली केरोलिना केरकेट्टा और खूंटी कर्रा रोड नवटोली निवासी मस्सी केरकेट्टा पर लगे आरोप सही पाए गए. इनकी गिरफ्तारी भी हुई थी. ये सभी आदिवासी युवकों को जुटाने में शामिल रहे हैं.

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