
- रातू रोड चौक से बिरसा चौक तक में लगे हैं 150 से अधिक स्ट्रीट लाइट, 120 के खुले बॉक्स में लटक रहे नंगे तार
- मुंह बाए स्ट्रीट लाइट के खंभे कर रहे एक और फलक का इंतजार
Nitesh Ojha
Ranchi : रांची शहर की देख-रेख करने वाली निगम की वजह से कुछ दिनों में रांची को हादसों का शहर कहा जाने लगेगा. हाल में फलक के साथ जो हुआ उसके बाद भी निगम ने सीख नहीं ली है.
राजधानी के वीआइपी मार्ग रातू रोड चौक से बिरसा चौक तक लगी स्ट्रीट लाइटों के खुले बॉक्स राजधानीवासियों के लिए जानलेवा बनी हुई है. इस मार्ग में 150 से अधिक स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, जिसमें से करीब 120 स्ट्रीट लाइटों के खंभों में नंगे तार लटक रहे हैं. मानो जैसे किसी भयानक दुर्घटना का इंतजार कर रहे हों.
इन नंगे तारों की चपेट में यदि कोई आ जाए तो करंट से उसकी जान जा सकती है. कुछ स्ट्रीट लाइटों की तारें तो सड़क पर फैली हैं. इन नंगे तारों को देखकर एक खौफ सा मन में बैठ गया है. क्योंकि जिस तरह से कुछ दिन पहले निगम की खुली नाली में गिरकर फलक नाम की एक बच्ची की मौत हुई थी उसी तरह कहीं निगम की एक और लापरवाही से किसी मासूम को फिर से अपने जान से हाथ ना धोना पड़े. 
ये स्ट्रीट लाइट के खंभों की खुली तारें कहीं जानलेवा साबित हो सकती हैं. निगम की कई महिला सफाई कर्मी रोजाना सुबह खंभे से सटे डिवाडर के किनारे झाडू भी लगाती हैं. वहीं कई लोग रोजाना डिवाडर के बीच खुली जगहों से सड़क पार करते हैं. ऐसे में नंगे तारों की वजह से अगर किसी तरह का कोई हादसा होता है, तो फिर इसके लिए जिम्मेवार कौन होगा.
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करीब 120 स्ट्रीट लाइटों के बॉक्स में खुली हैं तारें
पिछले दिनों खुली नाली में गिरकर फलक की मौत के बाद संवाददाता ने रातू रोड चौक से लेकर राज्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय तक में लगे स्ट्रीट लाइटों के नीचे लगे खुले बॉक्स को गिना.
यहां तक तकरीबन 150 से अधिक स्ट्रीट लाइटें लगी हैं. जिसमें से 120 लाइटों की बॉक्स पूरी तरह से खुली हैं. जब इन बॉक्सों को लगाया गया था, तो उसमें खतरा शब्द लिखा था. हालांकि अब वह मिट गया है. वहीं नंगे तारों को जोड़ने के लिए जिस ब्लैकटेप का उपयोग किया गया था वह अब सड़ने की कगार पर है. इससे कई बॉक्सों की तारें नंगी हो चूकी हैं. 
जमीन तक फैली हैं तारें, बरसात में खतरा ज्यादा
लापरवाही का यह आलम सबसे अधिक हरमू रोड स्थित दिगम्बर जैन भवन और आरगोड़ा से थोड़ा आगे जाने पर देखने को मिलता है. एक तरफ जहां दिगम्बर जैन भवन के करीब स्ट्रीट लाइटों के खंभों की नंगी तार काफी खतरनाक है.
वहीं दूसरे स्थानों पर इन स्ट्रीट लाइटों की तार जमीन तक फैली हैं. बरसात के मौसम में तारों का इस तरह खुला रहना काफी खतरनाक है. अगर कोई भी व्यक्ति या वाहन इसकी तार के चपेट में आता है, तो हदासा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है.
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जब तक देखूंगी नहीं, कुछ बोलूंगी नहीं: मेयर आशा लकड़ा
पूरे मामले पर मेयर आशा लकड़ा ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जबतक मैं खुद से देखूंगी नहीं, किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं करूंगी. 
5 से 6 दिनों में होगा समस्या का समाधान: संजीव विजयवर्गीय
डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने इसे एक लापरवाही बताया. कहा कि न्यूज विंग से मिली जानाकारी के बाद उन्होंने बिजली विभाग से इसकी जानकारी ली. उन्होंने कहा है कि 5 से 6 दिनों का समय दें, ताकि इन खुले तारों को ढकने का काम किया जा सके.
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सीएम व सचिव से मंगलवार को करेंगे बात : सीपी सिंह
नगर विकास मंत्री ने भी माना कि हरमू रोड जैसे व्यस्तम मार्ग पर खंभों के नीचे बॉक्स का खुला होना काफी खतरनाक है. मंगलवार को कैबिनेट की होनी वाली बैठक में वो इस बात को रखेंगे.
इस मामले पर वो मुख्यमंत्री, विभागीय सचिव सहित स्ट्रीट लाइट लगाने वाली संस्थान से बात करेंगे. मंत्री सीपी सिंह ने भी माना कि डिवाडर के बीच खुली जगहों से भी उन्होंने कई बार लोगों को सड़क पार करते देखा है, जो कि काफी खतरनाक है.

सीएम व सचिव से मंगलवार को करेंगे बात : सीपी सिंह


