
Pravin Kumar
हेमंत सरकार की ताजपोशी विपक्षी एकता के रूप में 29 नवंबर को झारखंड की राजधानी स्थित रांची मोराबादी मैदान में दिखेगी. जिस विनम्रता के समथ हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बने महागठबंधन ने सपथ ग्रहण समरोह में पक्ष और विपक्ष के नेताओं को निमंत्रण देने का काम किया, वह वर्तमान राजनीतिक माहौल में काबिल-ए-तारीफ है.
अमूमन हाल के वर्षो में भारतीय राजनीति में जिस तरह राग व द्वेष दिखा है, उसमें हेमंत का व्यवहार, जीत के बाद जिस तरह विन्रमता के साथ सामने आया है, इससे जाहिर है कि हेमंत नयी नजीर पेश करने जा रहे हैं.
पूर्व की भाजपा सरकार के मुखिया रघुवर दास पर एसटी-एसी थाने में दर्ज कराया गया मुकदमा भी वपास लेने की बात कहना झारखंड की राजनीति में ही नही देश की राजनीति भी में हेमंत के कद को बढ़ा देता है.
हेमंत सोरेन छात्र राजनीति में रहते हुए अपने बड़े भाई दुर्गा सोरेन की आकस्मिक मृत्यु एवं दिशुम गुरु शिबू सोरेन के बीमार रहने की वजह से राजनीतिक विरासत को संभालने के चुनौतीपूर्ण दयित्व को पिछले 10 वर्षो से निभा रहे हैं.
खुद को वैचारिक रूप से समृद्ध करने हुए पार्टी की जिम्मेवारी को उन्होंने बखूबी संभाला है. बड़े भाई दुर्गा सोरेन की आकस्मिक मृत्यु के कारण हेमंत को अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी. राजनीति में आने से पहले हेमंत सोरेन को फोटोग्राफी का भी शौक रहा. बहरहाल, दिशुम गुरु शिबू सोरेन ने उनपर विश्वास और भरोसा किया.

उससे दो कदम आगे जाकर गुरुजी के विश्वास को बनाये रखा. हेमंत सोरेन को संघर्ष की राजनीति विरसात में मिली है. लेकिन समान विचारधारा के दलों को जोड़े रखने का अद्भुत कौशल हाल के वर्षों में उनमें गुरुजी की तरह विकसित होता नजर आ रहा है.
लोकसभा चुनाव में बड़ी हार को आठ माह में जीत में बदल दिया
लोकसभा चुनाव में बड़ी हार का बदला हेमंत ने इस बार सत्ता हासिल कर ले लिया है. हेमंत सोरेन ने यह भी साबित किया है कि लोकसभा चुनाव का असर विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ता. और बीजेपी के तमाम दिग्गजों को शिकस्त देने में वे सफल रहे.
2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड की सत्ता से भाजपा को बाहर रखना और विधानसभा में सबसे बड़े दल के रूप में भाजपा को न आने देना हेमंत सोरेन के लिए बड़ी उपलब्धि है. राजनीतिक विश्लेषक भी हेमंत के इस प्रदर्शन का आकलन नहीं कर पा रहे थे.

इस चुनौती को हेमंत ने सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया. विधानसभा चुनाव में जिस ढंग से दूसरे दलों के वोट गठबंधन के दल एक दूसरे को ट्रांसफर करने में सफल हुए, इसकी यह सबसे खासियत है. हेमंत ने झामुमो के कार्यकर्ताओं के साथ साथ घटक दलों के कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ाया. जिससे बड़ी जीत की नई इबारत लिखी जा सकी.
अब 29 दिसंबर को नई सरकार का रांची के मोराबादी मैदान में शपथ ग्रहण होगा. झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन की कांग्रेस और राजद के गठबंधन वाली सरकार के कप्तान के रूप में ताजपोशी होगी. इसके लिए सियासी जगत के बड़े-बड़े नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है. इस यह प्रतीत होता है कि हेमंत सरकार का शपथ ग्रहण समारोह विपक्षी एकता का केंद्र बनने वाला है.

इन नेताओं ने शपथ ग्रहण समारोह में आने की सहमति दी है
प्रणव मुखर्जी पूर्व राष्ट्रपति, राहुल गांधी कांग्रेस, पूर्व केंद्रीय मंत्री अहमद पटेल, पी चितम्बरम, प्रियंका गांधी महासचिव कांग्रेस, अखिलेश यादव, मयावती पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, तेजस्वी यादव पूर्व उप मुख्यमंत्री बिहार, शरद पवार अध्यक्ष एनसीपी, ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल, अशोक गहलोत मुख्यमंत्री राजस्थान, कमलनाथ मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश, भुपेन वाघेला- मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़, उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री महाराष्ट्र, शरद यादव, एमके स्टालीन अध्यक्ष डीएमके, कुमार स्वामी मुख्यमंत्री कर्नाटक, अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री नई दिल्ली, हरिवंश उप सभापति राज्यसभा, कनहैया कुमार युवा नेता सीपीआई, केसी वेणुगोपाल नेता कांग्रेस, झारखंड कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह, सह प्रभारी कांग्रेस उमंग सिंघार,चन्द्रबाबू नायडू पूर्व मुख्यमंत्री आन्ध्र प्रदेश, टीआर बालू, कनीमोझी सांसद, अब्दुल बारी सिद्दीकी पूर्व मंत्री बिहार सरकार, हरीश रावत मुख्यमंत्री उत्तराखंड, रंजन पटनायक अध्यक्ष उड़ीसा कांग्रेस.





