
New Delhi: भारत की जनसंख्या में विस्फोट जारी है और ये तेजी से बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में भारत की जनसंख्या 1.36 अरब पहुंच गयी है.
2010 से 2019 के बीच भारत की जनसंख्या 1.2 की औसत वार्षिक दर से बढ़कर 1.36 अरब हो गई है. जबकि 1994 में देश की आबादी 94.22 करोड़ और 1969 में 54.15 करोड़ थी.
भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर चीन की वार्षिक वृद्धि दर के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है. वहीं विश्व की जनसंख्या 2019 में बढ़कर 771.5 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल 763.3 करोड़ थी.
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संयुक्त राष्ट्र की सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ एजेंसी ने स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2019, रिपोर्ट में कहा कि 2010 और 2019 के बीच भारत की जनसंख्या औसतन 1.2 प्रतिशत बढ़ी है.
इसकी तुलना में, 2019 में चीन की आबादी 1.42 अरब पहुंच गई है, जो 1994 में 1.23 अरब और 1969 में 80.36 करोड़ थी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 और 2019 के बीच चीन की आबादी 0.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक दर से बढ़ी है. उसके अनुसार, भारत में 1969 में प्रति महिला कुल प्रजनन दर 5.6 थी, जो 1994 में 3.7 रह गई.
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आयु के आधार पर जनसंख्या
भारत ने जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में सुधार दर्ज किया है. 1969 में औसत आयु 47 वर्ष थी, जो 1994 में 60 वर्ष और 2019 में 69 वर्ष हो गई है. विश्व की औसत जीवन प्रत्याशा दर 72 साल है.
विश्व जनसंख्या के आधार पर 0-14 आयु वर्ग की संख्या 26 फीसदी, 15-64 आयु वर्ग की संख्या 65 फीसदी और 65 से अधिक आयु वर्ग की संख्या 9 फीसदी है.
भारत की कुल जनसंख्या में 0-14 आयु वर्ग की संख्या 27 फीसदी, 15-64 आयु वर्ग की संख्या 67 फीसदी और 65 से अधिक आयु वर्ग की संख्या 6 फीसदी है.
चीन की कुल जनसंख्या में 0-14 आयु वर्ग की संख्या 18 फीसदी, 15-64 आयु वर्ग की संख्या 71 फीसदी और 65 से अधिक आयु वर्ग की संख्या 12 फीसदी है.
भारत की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार के संकेत देते हुये रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 1994 में प्रति 1,00,000 जन्मों में 488 मौतों से घटकर 2015 में प्रति 1,00,000 जन्मों में 174 मृत्यु तक आ गई.
यूएनएफपीए की निदेशक जेनेवा मोनिका फेरो ने कहा कि आंकड़े चिंताजनक है और दुनिया भर में करोड़ों महिलाओं के लिए सहमति और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के स्तर को बढ़ाना बेहद आवश्यक है.
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