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गरीब सफाईकर्मियों के 80 लाख डकार गयी आउटसोर्सिंग कंपनी

  • एस्सेल इंफ्रा से लेकर एटूजेड तक की एक कहानी

Ranchi :  रांची नगर निगम अंतर्गत डोर टू डोर कूड़ा उठाव के लिए एक बार आउटसोर्सिंग की तैयारी हो रही है. इस काम के लिए निकाले गये टेंडर में चार कंपनियों ने रूचि दिखायी है.

यह तैयारी उस दौर में हो रही है, जब एक साल पहले ही पूर्व की कंपनी एस्सेल इंफ्रा सैंकड़ों सफाईकर्मियों के करोड़ो रूपये लेकर फरार हो चुकी है. ऐसे में अगर फिर से कंपनी का चयन किया जाता है, तो निगम में भविष्य में फिर से वहीं खतरा मंडरा सकता है.

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एस्सेल इंफ्रा पर 80 लाख रुपये लेकर फरार होने का लगा था आरोप

हालांकि निगम ने पहले भी सफाई के काम की आउटसोर्सिंग की है. इसमें एटूजेड और एस्सेल इंफ्रा का नाम शामिल हैं. एटूजेड का सफाई काम के प्रति रवैया तो ठीक नहीं ही था. लेकिन एस्सेल इंफ्रा के कार्यशैली से नाराज कई बार निगम पार्षद बोर्ड बैठक में हंगामा कर चुके हैं.

बढ़ते विवाद को देख निगम बोर्ड से एस्सेल इंफ्रा को हटाने का तो फैसला किया गया, लेकिन कंपनी के जाने के बाद एक सच्चाई भी सामने आयी. कंपनी ने निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर सफाईकर्मियों के करोड़ो रुपये लेकर चंपत हो गयी.

वार्ड 26 के पार्षद अरुण झा का आरोप था कि एस्सेल इंफ्रा ने करीब 1400 कर्मियों का मानदेय नहीं दिया. उनके पीएफ अकाउंट में भी राशि जमा नहीं की हैं. करीब 80 लाख रूपये लेकर कंपनी फरार हो गयी है.

सूडा करेगा कंपनी का चयन

बता दें कि शहर की सफाई व्यवस्था को मॉडल बनाने के लिए निगम ने सफाई कार्य को चार हिस्सों में बांटा है. इसके लिए चार कंपनियों का चयन किया जाना है. सबसे पहली कंपनी शहर से कूड़े का उठाव करेगी. दूसरी कंपनी इस उठाए गए कूड़े को एमटीएस से झिरी तक ले जायेगी.

तीसरी कंपनी झिरी में डंप कूड़े का निपटारा करेगी और चौथी कंपनी शहर के सभी प्रमुख मार्गों की सफाई करेगी. कंपनी के लिए बीते कुछ माह पहले ही निगम ने कंपनी चयन के लिए एक टेंडर निकाला था. इस काम के लिए चार कंपनी ने रूचि दिखायी है. अब नगर विकास विभाग की सूडा द्वारा कंपनी का चयन किया जायेगा.

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आउटसोर्सिंग का विरोध आगे भी रहेगा जारी :  अरुण झा

नयी कंपनी के चयन प्रकिया को लेकर अरूण झा ने एक बार फिर नाराजगी जतायी है. उनका कहना है कि कंपनी से काम कराने का पूर्व का अनुभव काफी खराब रहा है. वहीं जब नयी कंपनी के चयन की बात हो रही है, तो इसे पहले निगम परिषद या स्टेंडिंग से पास कराना जरूरी था.

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग से सफाई काम कराने का विरोध उनका आगे भी जारी रहेगा.

निगम पर बढ़ेगा अतिरिक्त खर्च :  अर्जुन यादव

वार्ड 10 के पार्षद अर्जुन यादव का भी कहना है कि फिर से शहर की सफाई काम का आउटसोर्सिंग कराना सही नहीं है. पहले के जितनी कंपनियों ने सफाई काम किया है,उससे निगम को केवल नुकसान ही हुआ है. अभी निगम खुद से सफाई करा रहा है, जो कि काफी अच्छी रही है.

जनता द्वारा काफी कम शिकायत सुनने को मिल रही हैं.अब चार तरह से कंपनियों का काम कराये जाने से निगम पर अतिरिक्त खर्च भी बढ़ेगा.

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