
Ranchi: संसद में इन दिनों स्पाइवेयर ‘पेगासस’ पर भारी शोर है. 19 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में विपक्ष ने आरोप लगाया है कि पेगासस के जरिये केंद्र सरकार ने कई नामी गिरामी लोगों की फोन टेपिंग की है. केंद्र ने इस आऱोप का खंडन किया है. इसे लेकर झारखंड में राजनीतिक तापमान बढ़ा है. इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस और भाजपा ने मंगलवार को एक-दूसरे पर उंगली उठायी.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंत्री रामेश्वर उरांव ने पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पेगासस के जरिये केंद्र ने भारत के लोकतंत्र को कलंकित किया.
वहीं पूर्व सीएम औऱ भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भ्रम की राजनीति करने की आदत विपक्षी दलों ने नहीं छोड़ी है. बगैर तथ्यों के अनर्गल विषय पर अफवाह फैलाकर वे ना सिर्फ मोदी सरकार बल्कि देश की छवि को भी खराब करने में लगे हैं.
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संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन
रामेश्वर उरांव के मुताबिक इंडियन टेलिग्राफ एक्ट कहता कि बगैर सरकार के परमिशन के फोन टेप नहीं कर सकते. इसी तरह संविधान कहता है कि हर नागरिक के लिये लाइफ और लिबर्टी, दोनों अहम है. दोनों का प्रोटेक्शन जरूरी है.
ऐसे में पेगाइस की घटना का सामने आना चिंताजनक है. फोन टेपिंग के जरिये केंद्र ने संविधान और इसमें निहित कानूनों का उल्लंघन राजनीतिक षड़यंत्र के लिए जासूसी को अंजाम देना आपराधिक कृत्य है.
रिपोर्ट में शर्मनाक खुलासा हुआ है कि स्पाईवेयर पेगासस का इस्तेमाल 2019 के आम चुनावों में सेल फोन हैक करने के लिए भी किया जा रहा था. इसमें मोदी सरकार की मिलीभगत है.
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एंटी मोदी मिशन पर विपक्ष
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मॉनसून सत्र प्रारंभ होते ही पैगोसिस को लेकर हंगामा अपोजिशन ने शुरू कर किया. अब भी इस झूठे, तथ्यहीन विषय पर वह हंगामा बनाये हुए है. हाउस को घेर रहा है. पैगोसिस वाली बातों का कोई सिर पैर नहीं. जब नरेंद्र मोदी गुजरात में सीएम थे, तभी से तथाकथित बुद्धिजीवी, पत्रकार, साहित्यकार उनका विरोध करते आ रहे हैं.
बावजूद इसके मोदी को जनता से जनादेश मिला है. उस समय भी उन सबों ने ऐसा माहौल पैदा कर दिया मानो देश रहने लायक नहीं. बड़े-बड़े साहित्यकारों ने अपना सम्मान तक लौटा दिया.
अब भी तरह तरह से और योजनाबद्ध तरीके से वे एंटी मोदी मिशन पर लगे हैं. टूलकिट का उपयोग कर रहे. सीआईए, कृषि बिल, तीन तलाक कानून बनने के दौरान भी ऐसा ही था. कोरोना काल में भी सहयोग के बदले विरोध करने का भाव उन्होंने रखा. टीकाकरण पर विपक्ष ने भ्रम फैलाया.
अभी सब बौखलाहट में हैं. सूचना मंत्री सदन में प्रमाण मांग रहे पर किसी के पास कोई तथ्य नहीं है. महज हंगामा करने को राजनीति हो रही.
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