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लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का झामुमो पर पॉलिटिकल प्रेशर, चाईबासा सीट पर पेंच

थाम सकते हैं भाजपा और आजसू नेता के कद्दावर नेता कांग्रेस का दामन

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Ranchi : लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह जगन्नाथपुर विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा ने कांग्रेस का दामन थामा है, उससे पार्टी ने झामुमो पर पॉलिटिकल प्रेशर बना दिया है. चाईबासा क्षेत्र में वर्तमान में पांच विधानसभा सीटें हैं. इनमें वर्तमान में चार सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का कब्जा है. वहीं, एक सीट पर कांग्रेस में शामिल हुईं गीता कोड़ा विधायक हैं. चाईबासा में अपनी मजबूती को देखकर ही झामुमो ने सिटिंग सीट दुमका और राजमहल के अलावा गिरिडीह से भी चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी है. झामुमो चाईबासा संसदीय क्षेत्र से चंपई सोरेन को उतारना चाहती है. कहा जा रहा है कि भाजपा के एक बड़े नेता और आजसू पार्टी के टुन्डी विधायक राज किशोर महतो भी कांग्रेस पार्टी के संपर्क में हैं. अगर टुन्डी विधायक कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो वह गिरिडीह पर अपनी दावेदारी कर सकते है. दूसरी ओर, भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस हमेशा से चाह रही है कि महागठबंधन बने और सहमति से दलों के बीच सीटों का बंटवारा हो. लेकिन, जिस तरह से गुरुवार को गीता कोड़ा ने पार्टी की सदस्यता ली और बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा, उससे पार्टी ने झामुमो पर एक तरह का पॉलिटिकल प्रेशर बना दिया है.

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महागठबंधन के पक्ष में है कांग्रेस, झामुमो का भविष्य देख शंका में है पार्टी

पूरे मामले की जानकारी देते हुए कांग्रेस के एक बड़े नेता ने न्यूज विंग संवाददाता को बताया कि कांग्रेस शुरू से चाहती है कि भाजपा को हराने के लिए राज्य में लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन मजबूती से बने. बिना किसी विवाद के सीटों का बंटवारा पार्टियों के बीच हो. लेकिन, भविष्य में राज्य में झामुमो की राजनीतिक स्थिति को देखें, तो पार्टी को डर है कि विधानसभा चुनाव के बाद झामुमो फिर से मन बदलकर भाजपा के साथ सरकार न बना ले. इसी को देख पार्टी के शीर्ष नेता लगातार भाजपा और आजसू से नाराज चल रहे नेताओं के संपर्क में भी है. गीता कोड़ा के कांग्रेस में शामिल होने को इसी कड़ी में देखा जा रहा है.

चाईबासा है झामुमो का गढ़, जेवीएम को सीट देने में नहीं है परेशानी

गीता कोड़ा के कांग्रेस में शामिल होने से झामुमो पर इसलिए भी पॉलिटिकल प्रेशर है कि वर्तमान चाईबासा लोकसभा सीट पर पांच विधानसभा क्षेत्र (चाईबासा, मझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर और चक्रधरपुर सीट) हैं. इसमें जहां चार पर झामुमो (चाईबासा से दीपक बिरुवा,  मझगांव से निरल पुरती, मनोहरपुर से जोबा मांझी और चक्रधरपुर सीट से शशिभूषण सामड विधायक हैं) और जगन्नाथपुर पर मधु कोड़ा की जय भारत समानता पार्टी की विधायक गीता कोड़ा का कब्जा है. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के कोल्हान क्षेत्र में रहे प्रभाव को देख कहा जा रहा है कि गीता कोड़ा ही चाईबासा सीट से चुनाव लड़ेंगी. दूसरी ओर, जिस तरह से झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को राहुल गांधी से मुलाकात की, उससे भी झामुमो काफी प्रेशर में है. बाबूलाल और प्रदीप यादव ने दिल्ली में राहुल गांधी से मिलकर कोडरमा, गोड्डा और चतरा सीट पर दावा ठोका है. वहीं, गोड्डा सीट को छोड़ दिया जाये, तो कोडरमा और चतरा सीट देने में कांग्रेस को कोई परेशानी नहीं है. गोड्डा सीट पर कांग्रेस के कद्दावर नेता फुरकान अंसारी का दावा माना जा रहा है. यहां चुनाव लड़ने के लिए जिन उम्मीदवारों के नाम पर बातचीत चल रही है, उनमें अल्पसंख्यक समुदाय से एकमात्र नेता फुरकान अंसारी ही हैं. वहीं, पलामू सीट राजद को मिलनी तय है. ऐसे में महागठबंधन में केवल झामुमो ही है, जिसे सीट बंटवारे पर कुछ नाराजगी हो सकती है.

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आदिवासी नेताओं की लंबी फेहरिस्त है कांग्रेस में

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पश्चिमी सिंहभूम पहले से ही अनुसूचित जनजाति बहुल इलाका रहा है. चाईबासा संसदीय क्षेत्र स्थित पांचों विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. ऐसे में कांग्रेस और झामुमो, दोनों इस सीट पर अपनी दावेदारी ठोक रही हैं. कांग्रेस से जुड़े एक नेता ने बताया कि गीता कोड़ा (पीछे से मधु कोड़ा) से पहले भी कांग्रेस पार्टी में आदिवासी नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त रही है. इसमें पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू, पूर्व मंत्री देवेंद्र नाथ चाम्पिया, प्रदीप कुमार बलमुचू जैसे नेता प्रमुख हैं. वहीं, पूर्व सांसद बागुन सुम्ब्रई भी कांग्रेस के एक बड़े नेता रह चुके हैं, जिनका हाल ही में निधन हो गया.

भाजपा, आजसू नेता थाम सकते हैं कांग्रेस का हाथ

कांग्रेसी नेता का कहना है कि दुर्गापूजा के बाद भाजपा के एक कद्दावर नेता कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं. पहले पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का नाम चर्चा में तेजी से सामने आया था, लेकिन पार्टी नेता अब इस बात को नकार रहे हैं. उनका कहना है कि यह कतई नहीं है कि अर्जुन मुंडा जैसे भाजपा के कद्दावर नेता कांग्रेस में शामिल हों. हालांकि, संबंधित नेता ने भाजपा के ही सहयोगी आजसू पार्टी के टुन्डी विधायक राज किशोर महतो के कांग्रेस में शामिल होने की बात कह भाजपा को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है. उनका आना हालांकि इसलिए रुका है कि पार्टी महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है. ऐसे में कांग्रेस अभी टुन्डी विधायक पर कोई रुचि नहीं दिखाना चाहती है. कहा तो यह भी जा रहा है कि अगर वह कांग्रेस में शामिल हो जाते हैं, तो उन्हें गिरिडीह सीट देना पड़ सकता है. जबकि, इस सीट पर झामुमो ने पहले से ही अपनी दावेदारी ठोक दी है.

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चाईबासा सीट पर झामुमो लड़ेगा चुनाव : मझगांव विधायक निरल पुरती

हालांकि, पूरे मामले पर झामुमो नेता और मझगांव विधायक निरल पुरती का कहना है कि चाईबासा सीट पर झामुमो का लड़ना तय है. जहां तक गीता कोड़ा के कांग्रेस में शामिल होने की बात है, तो यह उनका निजी मामला है. वर्तमान में जब झामुमो के चार बड़े नेता यहां से विधायक हैं, तो यह सीट अपनेआप झामुमो की दावेदारी में आती है. महागठबंधन पर किसी तरह का प्रभाव पड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि विपक्षी महागठबंधन सही दिशा में है. लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी महागठबंधन ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर लिया है. इसमें झामुमो को चार सीट मिलनी तय है. इस पर महागठबंधन के नेता हेमंत सोरेन जल्द ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे.

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