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थोपे हुए उम्मीदवार स्वीकार नहीं, राजनीतिक दल करें जन आंदोलन के उम्मीदवारों का समर्थनः जेरोम

Ranchi:  नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम, पलामू व्याघ्र परियोजना एवं वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करने वाली केन्द्रीय जन संघर्ष समिति ने 2019 के विधानसभा चुनाव के लिए ताल ठोंकना शुरू कर दिया है. लोकसभा चुनाव के दौरान समिति ने महागठबंधन को समर्थन किया था. विधानसभा चुनाव में खुद के उम्मीदवार खड़ा करने का निर्णय कई दलो को परेशान भी कर सकता है. समिति ने आंदोलन वाले इलाके में पड़ने वाले क्षेत्र गुमला, विशुनपुर और मनिका से अपना उम्मीदवार खड़ा करने का निर्णय लिया है.

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संवाददाता सम्मेलन में जन आंदोलन के संयुक्त मोर्चा की संयोजक दयामणि बरला ने कहा आने वाले विधानसभा चुनाव में जल-जंगल -जमीन की लड़ाई लड़ने वाले विधानसभा में दस्तक देंगे. कई सीटों पर जन आंदोलनों के उम्मीदवार चुनाव मैदान उतरेंगे. महागठबंधन के दलों को जन आंदोलनों के लोगों का साथ देने पर विचार करना चाहिए.

क्या कहते है केन्द्रीय जन संघर्ष समिति के महासचिव जेरोम जेराल्ड कुजूर

संगठन में कई दौर के बैठक के बाद चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. समिति का मानना है कि अब तक राजनितिक दल, व निर्दलीय (अपने से) चुनाव लड़ते रहे हैं. जनता चुनाव नहीं लड़ती. लेकिन इस बार अपने हक अधिकारों के लिए इन तीन विधानसभा क्षेत्र से जनता चुनाव लड़ेगी. और अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी. जनता का उम्मीदवार केन्द्रीय जनसंघर्ष समर्थित उम्मीदवार होगा.

1995 में समिति ने बरनाड़ मिंज का समर्थन कर चुनाव में विजयी बनाया था. वहीं 2005 में भूषण तिर्की को समर्थन दे कर विधानसभा भेजा था. पिछले 26 -27 सालों से समिति अपने मुद्दे पर संघर्षरत है. इन 27 सालों में कई चुनाव हुए जिसमें हमने अपने राजनीतिक दलों को इस विश्वास के साथ वोट किया की वे हमारे मुद्दों पर पहल करें. और हमें राहत पहुंचाएं.  परन्तु आज तक हमारी भावनाओं एवं विश्वास के साथ धोखा हुआ है. अब हम हस्तक्षेप करना चाहते हैं. उस जगह, जहां नीति व नियम बनाये जाते हैं.

केन्द्रीय जन संघर्ष समिति से जुड़े अनिल मनोहर कहते है राजनीतिक दलों ने पिछल्ले 27 सालों से आंदोलन का इस्तेमाल करने का काम किया. लेकिन समिति जिन मुद्दे पर संर्घष कर रही है उन मुद्दों को विधानसभा पहुंच कर विधायक भूल जाते हैं.

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क्या है केन्द्रीय जन संघर्ष समिति के आंदोलन की पृष्टभूमि

केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति 1993 से नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम से होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करती आ रही है. अभी प्रभावित क्षेत्र में पलामू व्याघ्र परियोजना एवं वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से सम्भावित विस्थापन के खिलाफ संघर्ष कर रही है.

हाल के दिनो में समिति ने नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से 245 गांव , टूडरमा डैम से 55, पलामू व्याघ्र परियोजना 168 गांव, जिसमें से 8 को विभाग द्वारा खाली करने के लिए आदेश दिया गया है, के खिलाफ आवाज उठा चुकी है. सरकार को ग्रामसभा की ओर से लिखा गया है. वहीं समिति वाइल्ड लाइफ कोरीडोर के भी खिलाफ आंदोलन कर रही है. इसमें वाइल्ड लाइफ कोरीडोर के नाम पर 6 कोरीडोर बनाने का प्रस्ताव है. इससे 770 गांव प्रभावित होंगे.

केंद्रीय जनसंघर्ष समिति क्या होगा चुनावी मुद्दा

  • नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, टूडरमा डैम, पलामू व्याघ्र परियोजना व वाइल्ड लाइफ कोरीडोर से सम्भावित विस्थापन के खिलाफ.
  • पांचवीं अनुसूची को शक्ति से लागू करना.
  • समता जजमेंट को लागू करना.
  • सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट के प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ आवाज उठाना.
  • पेसा कानून का शत प्रतिशत अनुपालन.
  • ग्राम सभा की सहमती के बिना जमीन को लैंड बैंक में शामिल नहीं किया जाये.
  • वनाधिकार कानून 2006 को शक्ति से लागू किया जाये.
  • झारखंड भूमि अधिग्रहण कानून 2017 को रद्द करना.
  • वर्तमान सरकार की स्थानीय नीति / नियोजन नीति को निरस्त करना.

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