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मकान पर कब्जा के लिए भाई-बहन को कमरे में बंद रखने वाले डॉ. डीके गुप्ता को बचा रही पुलिस, चार दिन बाद FIR दर्ज

मकान हड़पने की नीयत से भाई-बहन को उनके ही घर में किया कैद !

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Bokaro: इस्पात सिटी बोकारो से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आयी है. को-ऑपरेटिव कालोनी में अपने ही घर में एक भाई-बहन को जानवरों की तरह कैद रखने का मामला सामने आया है. पूरे मामले में किरायेदार और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता की भूमिका संदिग्ध है.

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घटना के चार दिन बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज की है. हालांकि, आरोपी डॉक्टर अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. दरअसल, मिली के मुताबिक मकान हड़पने की नीयत से ये सारा खेल रचा गया था. सवाल ये उठता है कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना में संदिग्ध भूमिका वाले डॉक्टर डीके गुप्ता को आखिर पुलिस क्यों बचा रही है.

पुलिस को भाई-बहन के बयान का इंतजार

चार दिन पहले सामने आयी इस घटना को लेकर स्थानीय निवासी और पड़ोसी डॉ. डीके गुप्ता को सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वही पुलिस जांच के नाम पर खानापूर्ति करती नजर आती है. मामले को लेकर अबतक कोई कार्रवाई के नाम पर एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस को इंतजार है कि पीड़ित भाई-बहन की हालत सुधरे और वो बयान दे, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी. लेकिन सवाल ये उठता है कि जांच में ये ढिलाई, अपराधी को भागने और संभलने का मौका नहीं देगी.

विधायक बिरंची नारायण पर निशाना

इधर जेवीएम नेता डॉक्टर प्रकाश सिंह ने मामले की निपष्क्ष जांच की मांग की है. साथ ही, स्थानीय विधायक बिंरची नारायण पर, संदेह के घेरे में आये आरोपी डॉक्टर को बचाना का आरोप लगाया.


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आठ साल से कैद थी मिठू

दरअसल, पड़ोसियों ने काफी समय से दोनों भाई-बहनों को नहीं देखा था. पूछने पर उन्हें विक्षिप्त और बीमार बताया जाता था. बाद में स्थानीय लोगों ने पुलिस को जानकारी दी. जिसके बाद सिटी थाने के इंस्पेक्टर और डीएसपी मौके पर पहुंचे और घर को खुलवाने का प्रयास किया. काफी प्रयास के बाद घर के उपरी तल्ले का ताला खुलवाया जा सका, जहां पर दोनों भाई-बहनों को काफी दयनीय स्थिति में पाया गया. मिली जानकारी के मुताबिक एस के घोष की बेटी मंजू श्री घोष उर्फ मिठू घोष को आठ सालों से कैद रखा गया था. वही उनका भाई दीपक कुमार घोष कुछ महीनों से कैद था. दोनों की मानसिक स्थिति फिलहाल ठीक नहीं है.

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गंदे-बद्बूदार कमरे में कैद थी मिठू

हॉस्टपीटल में भर्ती मंजू श्री घोष

बोकारो के पॉश इलाके को- ऑपरेटिव कॉलोनी के प्लॉट नंबर 229 के गृहस्वामी दीपक घोष तथा मंजूश्री घोष को उन्हीं के घर में वर्षो से कैद करके रखा गया था. गृह स्वामी दोनों भाई-बहन को जहां रखा गया था, उस कमरे की हालत ऐसी थी कि उसमें जानवर को भी नहीं रखा जा सकता. गन्दा एवं बदबूदार, कमरा, जिसकी मानों सालों से सफाई नहीं की गई हो. ना बिजली- ना पानी, शौचालय, किचन की स्थिति ऐसी की खाली पड़े फर्श और रेक पर पंछियों के बीट एवं उनके पंखों की कई इंच मोटी व असहनीय बदबूदार परत जमा थी. पूरी जगह इतनी भयावह थी कि आम आदमी सहसा खड़ा भी नहीं हो सके.

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दीपक घोष से नौकरों की तरह व्यवहार

उल्लेखनीय है कि दीपक घोष मैट्रिक तक पढ़े हुए है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. डीके गुप्ता उन्हें नौकरों की भांति रखते थे. उससे दवाई लाने से लेकर हर काम करवाये जाते थे. वही कुछ महीनों पहले दीपक घोष भी अचानक से गायब हो गये थे. जबकि मिठू इंग्लिश में एमए है.

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20 साल पहले किराये पर लिया था मकान

20 वर्ष पहले मंतोष गुप्ता (डॉ. डीके गुप्ता के भाई) ने एस के घोष से उनका घर किराये पर लिया और अपने भाई के साथ मिलकर वहां आंखों का अस्पताल खोला. समय के साथ अस्पताल चल पड़ा.लेकिन जब से घर के मालिक घोष का देहान्त हुआ, उसके बाद से दोनों भाईयों ने किराया देना भी बंद कर दिया. और मकान पर कब्जा करने के फिराक मे लग गये.

स्थानीय लोगों की सजगता पर दोनों भाई-बहनों की जिंदगी बच सकी है. फिलहाल दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उनका इलाज चल रहा है. वही पुलिस ने मामले को संदिग्ध बताया है. पुलिस भाई-बहनों के सामान्य होने का इंतजार कर रही है. ताकि वो अपनी आपबीती बता सकें.

डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग

स्थानीय लोगों की मानें तो , डॉ. डीके गुप्ता और उनके स्टाफ दोनों भाई-बहनों को शारीरिक और मानसिक रुप से टॉर्चर करता था. घटना के सामने आने के बाद से नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ डीके गुप्ता की हर तरफ निंदा हो रही है. कई सामाजिक संगठनों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. हालांकि, फिलहाल वो पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.

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बताया जाता है कि मकान मालकिन मंजूश्री घोष बोकारो संत जेवियर्स स्कूल में बोकारो के तेजतरर्रार पूर्व एसपी अनिल पाल्टा की क्लासमेट रही हैं. मामला सामने आने के बाद सोसाइटी के लोग भी सक्रिये दिख रहे है. उधर बोकारो संत जेवियर्स की पूर्व छात्र संघ की ओर से दोनों के इलाज के लिए तीन लाख रूपये की सहायता राशि जमा की गयी है.

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