
Ranchi : झारखंड सरकार राज्य के पारा शिक्षकों और बीआरपी-सीआरपी को उनके पुत्र-पुत्रियों की उच्च शिक्षा और बेटियों की शादी के लिए ऋण मुहैया कराएगी. इस ऋण पर पारा शिक्षकों को कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा. उन्हें शून्य ब्याज पर कर्ज मिलेगा.
इसके अलावा पारा शिक्षकों के सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाने पर उनके आश्रितों/ परिजनों को पांच लाख रुपये की सहायता राशि बतौर मुआवजा दी जाएगी. इससे संबंधित निर्णय पर 22 फरवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में प्रस्तावित कल्याण कोष की आमसभा में मुहर लगने की संभावना है.
गौरतलब है कि राज्य के पारा शिक्षकों और बीआरपी- सीआरपी को अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम राशि दो लाख रुपये तथा बेटी की शादी के लिए अधिकतम डेढ़ लाख रुपये का ऋण शून्य ब्याज पर देने का प्रस्ताव पूर्व में किया गया है.
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असाध्य रोग के इलाज के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि
इसके साथ ही किसी भी पारा शिक्षक की सेवा काल के दौरान मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को पांच लाख रुपए की सहायता राशि देने का भी प्रावधान किया गया है.
यही नहीं, बल्कि राज्य सरकार ने पारा शिक्षकों को असाध्य रोग के इलाज के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि तथा दुर्घटना होने की स्थिति में दिव्यांगता की स्थिति में डेढ़ लाख रुपये की सहयोग राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान भी प्रस्ताव में है.
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मानदेय से प्रतिमाह दो सौ रुपये की कटौती का प्रस्ताव
विदित हो कि राज्य सरकार ने कल्याण कोष में दस करोड़ रुपये देने पर अपनी सहमति जता दी है. वहीं, इस कोष के लिए सभी पारा शिक्षकों के मानदेय से प्रतिमाह दो सौ रुपये की कटौती किए जाने का प्रस्ताव है.
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 22 फरवरी को प्रस्तावित कल्याण कोष की बैठक में उक्त प्रस्तावों पर मुहर लग जाने की संभावना है. बताया जाता है कि इस निर्णय के बाद पारा शिक्षकों की समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो जाएगा.
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