
Ranchi : पंचायत समिति सदस्यों के साथ राज्य सरकार के भेदभाव पूर्ण रवैये तथा दमनकारी नीति के विरोध में राजभवन के पास जाकिर हुसैन पार्क में आमरण अनशन प्रारम्भ हो चुका है.
राज्य के विभिन्न जिलों के 25 प्रमुख, उपप्रमुख तथा पंचायत समिति सदस्य अनशन पर बैठे.
इसे भी पढ़ें : पलामू: पशु अस्पतालों को साधन संपन्न बनाने के सरकारी दावे फेल, नहीं हैं सुविधाएं, जीवन रक्षक दवाएं तक नहीं
‘ग्राम पंचायत को लूट की छूट’
अनशन पर बैठे जनप्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है मगर ग्राम पंचायत को सरकार ने लूट की छूट देकर मध्यवर्ती पंचायत को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया है.
राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था अफसर शाही हावी हो गयी है जिससे गांव में आम जनों से जुड़े कार्य नही हो रहे हैं. अफसरो द्वारा ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के बीच विरोधाभास की स्थिति पैदा कर दी गयी है जिससे विकास के नाम पर राज्य में लूट-खसोट किया जा रहा है.
वहीं ग्राम पंचायत के मुखिया को यह भी समझ में नहीं आता कि पदाधिकारी अपना उल्लू सीधा करने के कारण जनप्रतिनिधियों को आपस में लड़ाने का काम करते हैं.
सरकार द्वारा अगर सरकारी अधिकारियों को पंचायत के कार्य में गलत ढंग से किये जा रहे हस्तक्षेप को नही रोका गया तो प्रखण्डों में कार्य बाधित करने का काम पंचायत समिति महासंघ द्वारा किया जायेगा.
इसे भी पढ़ें : पलामू: ननबैकिंग कंपनी में निवेशकों का 10 करोड़ बकाया, 168 एजेंट पहुंचे हाईकोर्ट
‘संघर्ष नहीं किया तो इतिहास माफ नहीं करेगा’
पंचायत समिति महासंघ के सचिव ने अनशन स्थल पर मीडिया से बात करते हुए कहा, जनता जनप्रतिनिधियों को चुनती है क्षेत्र का विकास के लिए जबकि सरकार और सरकारी पदाधिकारी राज्य में पंचायत समिति के हक अधिकार को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं. अगर हम त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के प्रवधानों को बहाल करने और अपने अधिकार के लिए संघर्ष नहीं करेंगे तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.
आमरन अनशन में पंचायत समिति महासंघ झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अमुक प्रियदर्शी, सचिव संजीव कुमार सिन्हा, पोटका प्रमुख सुकुरमनी टुडू, घाटशिला प्रमुख हीरामनी मुर्मू, केरेडारी उप प्रमुख रामस्वरूप ओझा सहित राज्य भर से आये हुए पदाधिकारी शामिल हैं.
इसे भी पढ़ें : युवा संवाद-3 : ‘पूर्ण बहुमत वाली सरकार अपने कार्यकाल में जेपीएससी से एक भी नौकरी नहीं दिला पायी’




