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#Palamu: शौचालय निर्माण में घोटाले में शोकॉज का जवाब नहीं देने पर पांकी के ब्लॉक कोर्डिनेटर बर्खास्त

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Palamu: पलामू जिले के पांकी प्रखंड के स्वच्छ भारत के कॉर्डिनेटर मो अजहर को जिले के उपायुक्त डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया है.

स्वच्छ भारत के जिला कॉर्डिनेटर अमित कुमार ने बताया कि पांकी प्रखंड के सगालीम व परसिया गांव में शौचालय निर्माण में अनियमितता सामने आने पर उपायुक्त द्वारा ब्लॉक कोर्डिनेटर मो अजहर को शोकॉज किया गया था.

निर्धारित अवधि में ब्लॉक कोर्डिनेटर द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया. नतीजा कार्रवाई करते हुए उपायुक्त ने ब्लॉक कोर्डिनेटर की सेवा समाप्त कर दी.

क्या है मामला?

दरअसल, मामला पांकी प्रखंड के सगालीम पंचायत से जुड़ा है. सगालीम व परसिया गांव में कागज पर ही 325 शौचालय बना कर 39 लाख रूपये की बड़ी राशि की निकासी कर ली गयी है.

ऐसा ब्लॉक कोर्डिनेटर मो अजहर, सगालिम मुखिया सोना कुंवर व जल सहिया सबिता देवी की मिलीभगत से हुआ है.

संबद्ध शौचालयों के निर्माण का जिम्मा रंजीत ट्रेडर्स को दिया गया था. इस मामले में बगैर शौचालय बनाये ही पैसे का भुगतान कर दिया गया है.

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शौचालय बने नहीं, हो गया पेमेंट

मार्च से लेकर अब तक आठ चेक रंजीत ट्रेडर्स के नाम पर काटे गये हैं. सगालीम में 312 शौचालय बनाये जाने थे, जिसमें 116 शौचालय ही बने.

196 शौचालय बनाये बिना 23 लाख 52 हजार रूपये का गबन कर लिया गया. सगालीम के पास में ही परसिया गांव में 380 शौचालय बनाये जाने थे जिसमें 251 ही बने. 129 शौचालय का 15 लाख 48 हजार रूपया अवैध निकासी कर लिया गया.

जिला से मिलान करने पर खुद को फंसता देख सहिया ने खोले थे राज 

इतनी बड़ी संख्या में जब शौचालय नहीं बने और इसका मिलान जिला स्तर पर होने लगा तो मामला सामने आया था. तब इस मामले का खुलासा जल सहिया सबिता देवी ने किया था.

जल सहिया सबिता देवी का कहना था कि मुखिया सोना कुंवर व उनके हस्ताक्षर से आठ किस्त में रंजीत ट्रेडर्स के नाम पर चेक दिया गया. कोर्डिनेटर मो अजहर ने जल्दी ओडीएफ कराने का दबाव देते हुए एडवांस पेमेंट रंजीत ट्रेडर्स को कराया.

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निर्धारित समय में नहीं दिया शोकॉज का जवाब

मामले को लेकर उपायुक्त ने कार्रवाई की और ब्लॉक कोर्डिनेटर मॉ अजहर को स्पष्टीकरण देने को कहा, लेकिन निर्धारित समय के भीतर ब्लॉक कोर्डिनेटर ने उपायुक्त को कोई जवाब नहीं दिया.

तीन वर्ष पूर्व ओडीएफ हो चुका है पलामू  

मजेदार तथ्य यह भी है कि तीन वर्ष पहले ही समग्र पलामू जिले को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन शौचालय के अभाव में चार महिलाओं की असामयिक मौतें हो चुकीं हैं.

स्थानीय लोगों सहित कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि जिले भर में शौचालय निर्माण में करोड़ों का घोटाला हुआ है. कई प्रखंड ऐसे हैं, जहां नाममात्र के शौचालय बने और उन्हें ओडीएफ घोषित कर दिया गया.

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