
Ranchi : प्रतिभावान और राष्ट्रीय चैंपियन ग्रैपलिंग खिलाड़ी ओवैस अरफात को मदद की दरकार है. पिछले तीन माह से वह डेढ़ लाख रुपये पाने की खातिर खेल विभाग के चक्कर काट रहा है. वह भी तब जब खेल मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने 21 अप्रैल को ही उसे मदद दिये जाने को खेल निदेशालय को लिखित तौर पर कहा था. मंत्री की चिट्ठी के बाद भी ओवैस ने खेल निदेशालय के कहने पर खिलाड़ी कल्याण सहायता कोष के तहत आवेदन किया. इन सबके बावजूद उसे मदद नहीं मिली है. अब तो स्थिति यह है कि निदेशालय उसके मामले में तीन महीने में फैसला नहीं ले सका. अब खेल निदेशक का पद भी रिक्त हो गया है. पूर्व निदेशक जीशान कमर को पिछले दिनों गोड्डा डीसी बना दिया गया. अब ऐसे में ओवैस का इंतजार और लंबा होना तय है.

क्यों चाहिये थी मदद
ओवैस ने राष्ट्रीय स्तर के चैंपियनशिप में लगातार दो बार झारखंड को उसने पदक दिलाये हैं. इंटरनेशनल स्तर की एक खेल प्रतियोगिता में उसे 18 मई को मास्को (रुस) जाना था. भारतीय ग्रेपलिंग कुश्ती टीम की ओर से उसका चयन इसके लिये हुआ था. इस प्रतियोगिता में भाग लेने को मास्को प्रोग्राम पर डेढ़ लाख रुपये की लागत आनी थी. पर ओवैस की आर्थिक स्थिति को देख झारखंड ग्रैपलिंग एसोसिएशन ने खेल मंत्री से 21 अप्रैल को लिखित अनुरोध भी किया था. मंत्री ने इसे वाजिब अनुरोध मानते हुए उसी दिन खेल निदेशक को इस पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था. पर इसके बाद से यह मामला निदेशालय में अटका ही पड़ा रह गया है. यहां तक कि किसी तरह से उधारी पैसे लेकर ओवैस मास्को से खेल कर लौट भी आया.
क्या कहते हैं ओवैस
ओवैस अभी सरला बिरला यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के छात्र हैं. बताते हैं कि पहले नेशनल ग्रैपलिंग कुश्ती चैंपियनशिप 2021 में वे तीसरे स्थान पर रहे थे. इसके बाद ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप 2022 में उन्हें दूसरा स्थान मिला. उनके पिता यासिर अराफात फतेउल्लाह रोड, रांची में एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. ऐसे में जब मास्को जाने को उनका चयन इंडियन टीम से हुआ तो सरकार से मदद मांगी. कई बार निदेशालय के चक्कर लगाने के बावजूद कोई खबर नहीं है. सरकार अगर यह मदद दे दे तो राहत होगी. मनोबल भी बना रहेगा.
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