
Rahul Guru
Ranchi : झारखंड में दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा व्यवस्था चरमरायी हुई है. राज्य सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिखायी पड़ रही है. राज्य में दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए स्पेशल शिक्षक के 643 पद हैं. इसमें से केवल 333 शिक्षक की काम कर रहे हैं. राज्य में अभी भी स्पेशल शिक्षक के 310 पद रिक्त हैं.
इसके साथ ही राज्य के चार जिले रांची, हजारीबाग, दुमका और पश्चिमी सिंहभूम में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्कूल भवन बन कर तैयार है. बीते एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ये स्कूल शुरू नहीं हो पाये हैं.
तैयार भवन में कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए स्कूल संचालित किये जाने हैं. स्कूल चलाने के लिए 6 फरवरी 2019 को ही शिक्षकों सहित अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए पद सृजित कर दिये गये हैं. इसके बाद भी न तो सृजित पदों में नियुक्ति हुई और न ही स्कूल शुरू हो पाया.
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40 से 50 लाख रुपये हैं एक भवन की लागत
मिली जानकारी के अनुसार चार जिले में बने स्कूल भवन में से एक-एक भवन की लागत लगभग 50 लाख रुपये है. इतने पैसे खर्च कर बनाये गये भवन बेकार पड़े हैं. इससे न तो दिव्यांग विद्यार्थियों को लाभ मिल पा रहा है और न ही शिक्षकों की नियुक्ति हो रही है. इन स्कूलों में जो नियुक्तियां होनी थी.
उसमें चारों स्कूलों में क्रमश: हेडमास्टर के एक-एक, सहायक शिक्षक के 09, रसोईया के 02, अनुसेवक के 01 और नाइट गार्ड का 01 पद है.
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रांची व पश्चिमी सिंहभूम में स्पेशल टीचर के सर्वाधिक पद
राज्य में स्पेशल टीचर 643 पद स्वीकृति हैं. इसमें सबसे ज्यादा पद हजारीबाग जिला में है. जिलावार सृजित पदों की बात करें तो बोकारो में 23,चतरा में 44, देवघर में 40, धनबाद में 38 , गढवा में 29, गिरीडीह में 52, गुमला में 26, हजारीबाग में 54, लातेहार में 54, लोहरदगा में 23, पलामू में 31, पश्चिमी सिंहभम में 66, रामगढ़ में 13, रांची में 60, खूंटी में 23, सरायकेला खरसांवा में 12, सिमडेगा में 36 पद स्वीकृत हैं.
अब इन पदों में नियुक्ति को लेकर राज्य नि:शक्तता आयुक्त ने राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखा है. उन्होंने स्पेशल टीचर संघ के पावेल कुमार की ओर से दी गयी जानकारी के आधार पर नियुक्ति करने को कहा है. पत्र में उन्होंने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 का हवाला दिया है.
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