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न्यायालय के आदेश पर आदिवासियों को वनक्षेत्र से हटाने के बचाने के लिये अध्यादेश लायें : माकपा

New Delhi : मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने वन्यक्षेत्रों से लगभग दस लाख आदिवासियों को हटाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुये आदिवासियों को इस स्थिति से बचाने के लिये केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की मांग की है. माकपा पोलित ब्यूरो ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि आदिवासियों और वन उपज से आजीविका चलाने वालों को अदालत के आदेश पर उजड़ने से बचाने के लिये मोदी सरकार को तत्काल अध्यादेश लाना चाहिये.

सिर्फ 40 प्रतिशत प्रस्तावों को ही ग्राम सभाओं ने स्वीकार किया

पार्टी ने कहा कि आदिवासियों को अदालती आदेश में उनकी किसी भूल के लिये दंडित नहीं किया गया है बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वन संसाधनों के दोहन संबंधी ‘वन अधिकार कानून’ को लागू कर पाने में नाकाम रहने के कारण इस संकट का सामना करना पड़ रहा है. पोलित ब्यूरो ने कहा कि संशोधित कानून के तहत वन उपज के दोहन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनुमति देने संबंधी सिर्फ 40 प्रतिशत प्रस्तावों को ही ग्राम सभाओं ने स्वीकार किया है.

ग्राम सभा पर निजी कंपनियों के दबाव में स्वीकार

पार्टी ने दिसंबर 2018 के आंकड़ों के आधार पर बताया देश भर में इस तरह के 42.19 लाख प्रस्ताव मिले, इनमें से सिर्फ 18.89 लाख प्रस्तावों को ही ग्राम सभाओं ने स्वीकार किया है. पार्टी ने कहा कि जो प्रस्ताव स्वीकार किये गये वे ग्राम सभा पर निजी कंपनियों के दबाव में स्वीकार हुये.  माकपा ने आरोप लगाया कि अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील जानबूझ कर गैरहाजिर रहे. पार्टी ने सरकार को आदिवासी अधिकारों के खिलाफ ‘परोक्ष युद्ध’ से बचने के प्रति आगाह करते हुये सरकार से इस मामले में अध्यादेश लाने की मांग की.

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