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जेबीवीएनएल फाइनांस कंट्रोलर उमेश कुमार को डीमोट करने का आदेश

नियमों का ताक पर रख हुआ प्रमोशन

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: जेबीवीएनएल में कुछ अधिकारी नियमों और कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें शीर्ष अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है. जाहिर तौर पर संरक्षण के एवज में शीर्ष अधिकारियों को भी फायदा पहुंचता होगा. जेबीवीएनएल के फाइनांस कंट्रोलर उमेश कुमार के प्रमोशन को लेकर एजी ने 30 जुलाई 2015 में विभाग को चिट्ठी लिखकर आपत्ति जतायी थी. बता दे चलें कि जेबीवीएनएल का गठन तब हो चुका था और उस वक्त जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार थे. बड़ी बात ये भी है कि जेबीवीएनएल ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आता है. और ऊर्जा विभाग खुद मुख्यमंत्री के हाथों में है. यानी सीएम की नाक के नीचे अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं.

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राहुल पुरवार 12 फरवरी 2015 से ही जेबीवीएनएल के एमडी पद पर हैं. लेकिन एजी की चिट्ठी के बाद भी विभाग की तरफ से किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गयी. उमेश कुमार आज भी जेबीवीएनएल के फाइनांस कंट्रोलर की पद पर बने हुए हैं. लेकिन बोर्ड की एक समीक्षा बैठक में ऊर्जा विभाग के सीएमडी नितिन मदन कुलकर्णी ने उमेश कुमार के प्रमोशन की जांच कर रही एक समिति की अनुशंसा को मान कर उमेश कुमार को डीमोट करने का आदेश दिया है. डिमोशन की कार्यवाही चल रही है. विभाग की तरफ से उमेश कुमार शो-कॉज हो चुका है. बताते चलें कि न्यूज विंग ने मामले पर जुलाई में “जेबीवीएनएल : जिस पर 15 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आरोप, उसे चार साल से बचा रहे हैं एमडी राहुल पुरवार” शीर्षक से खबर छापी थी. जिसके बाद बोर्ड बैठक में उमेश कुमार को डीमोट करने का फैसला लिया गया है.

एजी की चिट्ठी के बाद समिति ने भी बताया प्रमोशन को गलत

एजी की रिपोर्ट के बाद विभाग की तरफ से 10 नवंबर 2016 को पांच सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया गया. समिति में अशोक कुमार सिन्हा (सदस्य सचिव), आरके अग्रवाल (सदस्य), अतुल कुमार (सदस्य), केके झा (सदस्य) और सीडी कुमार (अध्यक्ष) के तौर पर शामिल थे. समिति ने सात बिंदुओं पर अपनी आपत्ति जताते हुए निष्कर्ष में साफतौर पर लिखा है कि एजी ने जो आपत्ति उमेश कुमार के प्रमोशन को लकेर उठायी थी, वो सही हैं. उन्हें दिया गया प्रमोशन नियम के मुताबिक नहीं है.

उमेश कुमार को वापस करने होंगे तीन साल के वेतन और सुविधाएं

बता दें कि समिति ने कहा है कि जो प्रमोशन उमेश कुमार को 2008 में दिया गया है, वो प्रमोशन उन्हें 2011 से मिलनी चाहिए थी. समिति की जांच रिपोर्ट पर सीएमडी नितिन मदन कुलकर्णी ने कार्रवाई करने का आदेश दे दिया है. विभागीय कार्यवाही चल रही है. कार्यवाही खत्म होते ही उमेश कुमार का फाइनांस कंट्रोलर पर प्रमोशन 2011 से माना जाएगा. ऐसे में 2008 से लेकर 2011 के प्रमोशन की तारीख तक उन्हें फाइनांस कंट्रोलर के एवज में मिले वेतन के साथ मिली सुविधाओं की राशि भी सरकार को वापस करनी होगी.

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क्या थी एजी की आपत्ति जिसपर समिति ने लगायी मुहर

एजी की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, जेएसइबी (झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड) के अकाउंट विभाग में किसी भी तरह की नियुक्ति, बहाली या प्रमोशन बीएसइबी के एकाउंट्स सर्विस कोड कैडर रूल 1991 के मुताबिक होगी. लेकिन उमेश कुमार के प्रमोशन के मामले में इस नियम को ताक पर रख दिया गया. नियम के मुतबाकि बोर्ड में दो ही फाइनेंस कंट्रोलर का पद हो सकता है. एक जेनरल कैटेगरी के लिए और एक एसटी कैटेगरी का. 17 नवंबर 2008 को प्रमोशन को लेकर विभाग की एक बैठक होती है. उस बैठक में उमेश कुमार एक प्रेजेंटेशन देते हैं. जिसके मुताबिक उन्हें प्रमोशन देकर फाइनेंस कंट्रोलर बना दिया जाना चाहिए था. बीएसइबी के सर्विस कोड को दरकिनार कर बैठक में एक और नया फाइनेंशियल कंट्रोलर का पोस्ट बना दिया गया. तत्कालीन फाइनेंस कंट्रोलर निरंजन राय की अनुशंसा पर अमित बनर्जी और उमेश कुमार को भी फाइनेंस कंट्रोलर के पद पर प्रमोशन दे दिया गया.

एसटी कैटेगरी में कर दिया उमेश कुमार का प्रमोशन

उमेश कुमार जेनरल कैटेगरी से आते हैं. लेकिन उन्हें जो प्रमोशन दिया गया वो एसटी कैटेगरी में दे दिया गया. क्योंकि अमित बनर्जी जिन्हें दूसरा फाइनेंस कंट्रोलर के पद पर प्रमोशन मिला था वो उमेश कुमार से सीनियर थे. लिहाजा एजी की रिपोर्ट में कहा गया कि अमित बनर्जी का फ्रमोशन नियम के मुताबिक है और उमेश कुमार का प्रमोशन गलत तरीके से किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, उमेश कुमार का प्रमोशन एसटी कैटेगरी वाले पद पर किया गया. इस तरह वित्त विभाग में किए गए प्रमोशन में दो गड़बड़ियां की गयी. पहला फाइनेंशियल कंट्रोलर के लिए तीन पद सृजित कर दिये गये और दूसरा एसटी कैटेगरी में किसी जेनरल का प्रमोशन कर दिया गया.

कार्रवाई नहीं होना संरक्षण की ओर करता है इशारा

इतनी गड़बड़ियां होने के बाद भी उमेश कुमार पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. इसे साफ तौर से कहा जा सकता है कि इन्हें विभाग के शीर्ष अधिकारी का संरक्षण मिला हुआ है. इससे पहले टीडीएस घोटाले को लेकर सीएमडी की चिट्ठी के बाद भी एमडी राहुल पुरवार ने कुछ नहीं किया. इसके बाद जेबीवीएनएल बनने के बाद एजी ने उमेश कुमार के प्रमोशन को लेकर रिपोर्ट जारी की. लेकिन जेबीवीएनएल में फाइनेंस कंट्रोलर के पद पर उमेश कुमार ही बैठे हुए हैं. जिन्हें प्रमोशन ही गलत तरीके से दिया गया है. इस मामले में एमडी राहुल पुरवार से पूछे जाने पर साफ कहा कि पहले आपको इसकी जानकारी किसने दी उसका सोर्स बताएं. आरटीआई के तहत कागजात पब्लिक डोमेन में लायें. उसके बाद ही मैं इस बारे में कुछ कह पाऊंगा. एमडी का इतना कहना ही जाहिर करता है कि उन्होंने अपने विभाग में गलत तरीके से प्रमोशन पाए फाइनेंस कंट्रोलर उमेश कुमार को संरक्षण दिया है.

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