
Ranchi: झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से पत्र जारी कर 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं करने वाले पारा शिक्षकों को हटाने की बात कही गयी थी. लेकिन ऐसे अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों पर बिना कोई निर्णय लिए काम लिया जाता रहा.
वहीं अब इन पारा शिक्षकों को पूर्व के विभाग के आदेश के मुताबिक, मिड डे मील चावल वितरण काम में लगाया गया. ऐसे पारा शिक्षकों की ड्यूटी क्वारेंटाइन सेंटर्स पर लगायी गयी है. इन शिक्षकों से आठ-आठ घंटे के शिफ्ट में काम लिया जा रहा है.
विभाग की ओर से दिये गये कार्यों को करने के बाद भी ऐसे पारा शिक्षकों का मानदेय नहीं दिया जा रहा है. इस संबंध में कई अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों ने कहा कि मानदेय की मांग किये जाने पर परियोजना निदेशक के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें राशि का भुगतान नहीं किया गया.
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‘काम लिया गया है तो वेतन भी मिले’
पारा शिक्षकों का कहना है कि जब मानदेय ही नहीं देना था तो काम क्यों लिया गया? अनट्रेंड पारा शिक्षकों का कहना है कि काम लिया गया है तो उन्हें वेतन भी चाहिए.
वहीं इस बाबत पूछे जाने पर एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के संयोजक विनोद बिहारी ने बताया कि शिक्षकों को हटाने की जो प्रक्रिया परियोजना की ओर से की गयी वो गलत है. विभाग सीधा चिट्ठी जारी कर शिक्षकों को नहीं हटा सकता है. ऐसे में काम लेने के बाद भी मानदेय नहीं देने की वजह से काम कर रहे पारा शिक्षकों के समक्ष घोर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है.
4000 अनट्रेंड पारा शिक्षकों को नहीं मिला मानदेय
वहीं मोर्चा के संजय दूबे ने कहा कि मुख्यमंत्री से ऐसे विकट परिस्थिति में काम कर रहे पारा शिक्षकों के मानदेय भुगतान का अनुरोध किया गया है. ऐसे अनट्रेंड पारा शिक्षकों की संख्या लगभग 4000 है, जिन्हें मानदेय नहीं दिया गया है.
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इसके अतिरिक्त अन्य पारा शिक्षकों में लगभग 2300 पारा शिक्षक ऐसे भी हैं जिनका तकनीकी कारणों से अटेंडेंस नहीं बन पाया उनका भी मानेदय रोका गया है. वहीं अन्य पारा शिक्षकों के मानदेय का भुगतान मार्च माह तक का कर दिया गया है.
गौरतलब है कि झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से 24 जून 2019 को एक पत्र सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजा गया था. इस पत्र में कहा गया था कि वैसे पारा शिक्षक जिन्होंने 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है, उन्हें हटाया जाये.
यह पत्र विभिन्न जिला के परियोजना कार्यालय में ही रह गया. इसके बाद पुन: 29 अगस्त 2019 को परियोजना मुख्यालय की ओर से एक पत्र भेजा गया. इसमें एनसी लगे हुए पारा शिक्षकों को हटाने तथा जिन पारा शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है उनके प्रमाणपत्र को जांच-पड़ताल के बाद विद्यालय प्रबंधन समिति से अग्रसारित कराकर प्रखंड प्रबंधन समिति और फिर राज्य मुख्यालय को भेजना था.
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