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हेमंत सरकार का एक सालः नक्सलियों की दहाड़ पर दबिश, या तो मारे गए या सलाखों के पीछे

झारखंड में 2013 में 425 नक्सली घटनाएं हुईं थीं, 2020 में 20 घटनाएं हुईं

Ranchi : झारखंड में हेमंत सरकार का कल (29 दिसंबर) एक साल पूरा हो रहा है. हर मोर्चे पर सरकार के कामकाज का आकलन हो रहा है. नक्सली झारखंड के बिग इश्यू में शुमार रहा है और है भी. इस एक साल में नक्सलियों पर लगाम कसने में सफलता मिली है. कई कुख्यात नक्सली या तो मारे गए या सलाखों के पीछे गए.

 

झारखंड पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया. पुलिस वहां तक पहुंच बनाने में सफल रही है जहां तक पहुंचने से पहले पुलिस हिचकिचाती थी. पुलिस की सक्रियता से नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से भी गुरेज करते रहे. आंकड़े बता रहे हैं कि झारखंड में नक्सली संगठन कमजोर पड़ा है.

माओवादी पड़ रहे हैं कमजोर

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आंकड़े बता रहे हैं कि माओवादियों ने 2013 में झारखंड में 425 नक्सली घटनाएं हुई थी, जो 2015 में घट कर 176 हो गयी. 2020 आते आते ये संख्या मात्र 20 पर सिमट गई है. इसका बड़ा कारण है पूरे राज्य में नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सीआरपीएफ का कैंप बनना, 20 साल में 12 हजार से ज्यादा नक्सल विरोधी अभियान चलना, कई बड़े नक्सलियों का मारा जाना, कई की गिरफ्तारी होना, बड़े नक्सलियों का समर्पण करना है.

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कब कितने नक्सली मारे गए

-साल 2014 में 16 नक्सली एनकाउंटर में मारे गए ,जबकि 267 गिरफ्तार किए गए और 2 नक्सलियो ने सरेंडर किया

-साल 2015 में 28 नक्सली एनकाउंटर में मारे गए जबकि 220 गिरफ्तार किए गए और 9 ने सरेंडर किया

-2016 में 15 नक्सली मारे गए 184 गिरफ्तार किए गए और 27 ने सरेंडर किया

-2017 में चार नक्सली मारे गए 208 नक्सली गिरफ्तार किए गए,40 नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार डाले

-2018 में  45 नक्सली एनकाउंटर में मारे गए, 170 गिरफ्तार किए गए, 16 ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है

– 2019 में 54 नक्सली इनकाउंटर में मारे गये, 270 गिरफ्तार हुए, 12 ने आत्मसमर्पण कर दिया

 

 

पीएलएफआई ने बढ़ायी है सक्रियता मगर नियंत्रण में

राज्य में घटनाओं को अंजाम देने में पीएलएफआई के नक्सलियों ने अपनी सक्रियता बढ़ायी है. इस बात की पुष्टि पुलिस अधिकारियों द्वारा नक्सलवाद और उग्रवादी संगठन द्वारा 3 वर्ष में घटनाओं को लेकर तैयार आंकड़ों से होती है. वर्ष 2020 अक्टूबर माह के अंत तक पीएलएफआई के उग्रवादियों ने कुल 40 घटनाओं को अंजाम दिया. जबकि पीएलएफआई ने 2019 में जुलाई माह तक में 16 और 2018 जुलाई माह तक में सिर्फ 10 घटनाओं को अंजाम दिया था. इसी तरह वर्ष 2019  की अपेक्षा वर्ष 2020 अक्टूबर माह तक में भाकपा माओवादी के नक्सलियों द्वारा कुल घटना को अंजाम देने में कमी आयी है. क्योंकि आंकड़ों के अनुसार नक्सलियों ने  2019  में 39 घटनाओं को अंजाम दिया था. जबकि अक्टूबर 2020 तक यह घटना 40 रही. राज्य में टीएसपीसी के नक्सलियों की भी सक्रियता में पिछले वर्ष की तुलना में कमी आयी है. क्योंकि जहां  2019 तक टीएसपीसी के नक्सलियों ने 12 घटनाओं को अंजाम दिया था. वहीं दूसरी ओर अक्टूबर 2020 तक सिर्फ 10 घटनाओं को अंजाम दिया. जेपीसी के नक्सलियों के  द्वारा घटनाओं को अंजाम दिए जाने में नियंत्रण लगा है. क्योंकि जहां  2018 में जेपीसी के उग्रवादियों ने 5 घटनाओं को अंजाम दिया था.

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वहीं दूसरी ओर  2019 में मात्र 3 घटना को अंजाम दिया. जबकि अक्टूबर 2020 तक  इस संगठन के नक्सलियों के द्वारा किसी घटना को अंजाम दिए जाने की बात सामने नहीं आयी है. इसी तरह जेजे एमपी के उग्रवादियों की सक्रियता में कोई कमी नहीं आयी है. इस बात की पुष्टि संगठन द्वारा घटना को अंजाम दिए जाने को लेकर तैयार आंकड़ों से भी होती है. पीएलएफआई की सक्रियता के कारण पिछले वर्ष की अपेक्षा वर्ष 2020 में पीएलएफआई के नक्सली अधिक संख्या में गिरफ्तार भी किए गए. जहां वर्ष 2019 में  पीएलएफआई के 60 नक्सली गिरफ्तार किए गए थे. वहीं अक्टूबर 2020 तक पीएलएफआई के 109 नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

साल 2000 से लेकर 2016 तक झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में सीआरपीएफ की भूमिका बेहद अहम थी लेकिन अब पुलिस के पास भी अपनी नक्सल विशेषज्ञ फोर्स झारखंड जगुआर उपलब्ध है। झारखंड जगुआर लगातार नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन चला रहा है और उसमें सफलताएं भी मिल रही है।

सरेंडर पॉलिसी हो रही है कारगर

नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सरकार ने सरेंडर पॉलिशी बनायी है. इसमें आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को ईनाम दिया जाता है. तीन लाख रुपये अलग से मुआवजे का भी प्रावधान है. आचरण अच्छा रहा तो ओपन जेल में रखा जाता है. साथ ही सरकार अपनी इच्छा पर सरकारी नौकरी भी दे सकती है. पत्नी को कौशल विकास का प्रशिक्षण, दो बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा का खर्च और मकान बनाने के लिए राज्य के किसी भी हिस्से में चार डिसमिल जमीन दिए जाने का प्रावधान है. केस लड़ने के लिए सरकारी वकील की सुविधा भी दी जाती है.

 

झारखंड में इन संगठनों पर भी है प्रतिबंध

एमसीसीआई,  पीएफएफआइ,  एमसीसीआई के अग्र संगठन क्रांतिकारी किसान कमेटी,  नारी मुक्ति संघ,  क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच,  जेपीसी, टीपीसी,  जेजेएमपी,  एसजेएमएम,  सशस्त्र पीपुल्स मोर्चा, संघर्ष जनमुक्ति मोर्चा, झारखंड टाइगर ग्रुप.

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