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एक रुपये किलो खीरा, दो रुपये टमाटर, तीन रुपये कद्दू… खून के आंसू रो रहे किसान

Ranchi: वैश्विक महामारी कोरोना कालखंड में किसानों को चौतरफा नुकसान उठाना पड़ रहा है. लॉकडाउन के दौरान सब्जी फसल की कीमत नहीं मिल पाने के कारण किसान खून के आंसू बहाने को मजबूर हैं.

सब्जी बेचने की समय सीमा के कारण सब्जियों को व्यापारियों के द्वारा औने-पौने दाम पर खरीदने से किसान भारी परेशान हैं. बेड़ों में किसानों को टमाटर की कीमत नहीं मिल रही. महज दो से तीन रुपये की कीमत पर टमाटर को बेचने के लिए किसान मजबूर हैं.

भारी नुकसान के कारण किसान अपने द्वारा उत्पादित टमाटर को खेतों में ही छोड़ देने के लिए मजबूर हैं. पुरियो के किसान मनीष कुमार महतो ने ढाई एकड़ में टमाटर की फसल लगाई थी लेकिन लॉकडाउन के दौरान 1 रुपये से लेकर तीन रुपये प्रति किलो टमाटर का रेट मिलने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा.

मनीष कुमार महतो ने कहा कि 10 रुपये से कम टमाटर की कीमत मिलने से किसानों को भारी नुकसान है. बाजार तक ले जाने में प्रति किलो 3 रुपये सिर्फ ढुलाई में खर्च है. टमाटर तोड़ने में मजदूरी अलग और पूंजी अलग लगती है.

किसान मित्र और बेड़ो के जरिया के निवासी ब्रजेश कुमार महतो के अनुसार किसान अपने द्वारा उत्पादित सब्जी की फसल की कीमत भी तय नहीं कर पाते. सब कुछ व्यापारियों के रहमोकरम पर है. अभी लॉकडाउन के कारण व्यापारी औने-पौने दाम में सब्जी खरीद रहे हैं और किसान दिल पर पत्थर रखकर अपने द्वारा उत्पादित सब्जियों को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हैं.

उन्होंने बताया कि थोक मंडी में खीरा 1 रुपए प्रति किलो, मूली दो से तीन रुपए, बैगन 4 रुपए, बंधा गोभी 4 रुपए, कद्दू 2 से 3 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है जिससे किसानों को हजारों का नुकसान है.

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मनीष कुमार महतो ने बताया कि हरी मिर्च की खेती उन्होंने डेढ़ एकड़ में की है. उसमें रोग भी लग रहा जिसके कारण भारी पैमाने पर दवा का उपयोग किया जा रहा है. बाजार में अभी हरी मिर्च 10 से 12 रुपये बिक रही है, जबकि लॉकडाउन के पूर्व कम से कम 30 से 35 रुपये किलो की दर से बिक रहा था.

ब्रजेश कुमार महतो बताते हैं कि बेड़ो प्रखंड में 7700 किसानों ने केसीसी कराया है. कई किसानों ने महिला ग्रुप से निजी तौर पर ऋण लिया है. भारी पूंजी लगाकर किसान खेती तो कर रहे लेकिन उन्हें सही कीमत नहीं मिल रही है.

जरिया के किसान पंकज कुमार महतो को तरबूज की खेती में ढाई लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. ब्रजेश कुमार महतो ने बताया कि डीएपी खाद की कीमत व्यापारियों ने 1200 से 1400 रुपये के स्थान पर बढ़ाकर 2000 रुपए प्रति बैग कर दी है. खाद के अलावे दवा की दाम में भी भारी बढ़ोतरी हुई है.

छेदी महतो ने कहा कि किसान चौतरफा मार झेल रहे हैं. पहले तो ओलावृष्टि हुई लेकिन उसका मुआवजा अभी तक नहीं मिला. किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हो गया था. ब्लॉक में उसकी फाइल पड़ी हुई है. अब कोई सुनने वाला भी नहीं. किसानों द्वारा सरकार को भारी पैमाने पर धान बेचा गया लेकिन अभी तक उसका भुगतान नहीं हो पाया है.

पुरियो के किसान कैलाश भगत, जितेंद्र महतो, लक्ष्मण महतो ने भी बताया कि कीमत कम मिलने के कारण टमाटर को उन्होंने खेतों में ही छोड़ दिया. गांव के विश्वनाथ महली और मनमोहन कुमार महतो भी सब्जी फसल की कीमत नहीं मिलने के कारण खून के आंसू रोने को मजबूर हैं.

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