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दल-बदल मामले पर टूटा बाबूलाल का संयम, कहा- वे झारखंड के लोगों को @### समझते हैं क्या

  • कहा- बीजेपी बेईमानों की पार्टी, स्पीकर को बने रहने का हक नहीं, संविधान के खिलाफ दिया जजमेंट
  • पार्टी न्याय के लिए जनता की अदालत में जाने के साथ हाई कोर्ट भी जायेगी

Ranchi : दल-बदल मामले में स्पीकर द्वारा दिये गये फैसले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री सह झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को स्पीकर और बीजेपी पर जमकर भड़ास निकाली. इस भड़ास का टेंपरेचर इतना हाई था कि ठंडे मिजाज के माने जानेवाले बाबूलाल का माथा गरम हो गया और अपनी जुबान पर से उनकी पकड़ फिसल गयी. कह दिया- ये लोग (बीजेपी वाले) झारखंड के लोगों को चू@### समझते हैं क्या. उनकी नरम जुबान से निकला यह कंटीला शब्द (चू@###) सुन सुननेवाले भी स्तब्ध रह गये कि क्या यह वही बाबूलाल मरांडी हैं, जो अपनी बातों, अपने वक्तव्यों में संयम का हमेशा परिचय देते रहे हैं. उनकी अपनी ही पार्टी के कई अधिकारी भी सन्न रह गये और बगलें झांकने लग गये. दल-बदल पर स्पीकर के फैसले ने बाबूलाल मरांडी को कितनी चोट पहुंचायी है, यह उनके मुख से निकले इस अपशब्द ने जाहिर कर दिया है.

कहा- बेईमान लोगों की पार्टी है बीजेपी

पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बाबूलाल मरांडी ने दो टूक कहा, “बीजेपी बेईमान लोगों की पार्टी है. विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव का जजमेंट संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नहीं  है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहने का अधिकार खो दिया है. उन्हें संविधान और नियम-कानून की भी परवाह नहीं है. स्पीकर का जजमेंट 10वीं अनुसूची के खिलाफ है. इस मामले को लेकर पार्टी जनता की अदालत में जाने के साथ हाई कोर्ट में भी जायेगी.”

झारखंड की बदहाली के लिए ऐसे लोग ही जिम्मेदार

बाबूलाल ने स्पीकर और सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि झारखंड की बदहाली के लिए ऐसे लोग ही जिम्मेदार हैं, जो विधानसभा में बैठे हुए हैं. उन्हें नियम-कानून और संविधान की परवाह नहीं है. जनता की अदालत में बीजेपी के लोगों से जब यह सवाल पूछा जायेगा, तो ये लोग पूरे देश में तड़पेंगे. अब दूसरे लोग भी इसी फैसले का अनुसरण करेंगे. बाबूलाल ने फिर बीजेपी से सवाल किया कि आखिर बीजेपी देश को कहां ले जाना चाहती है. इन लोगों ने देश और संविधान को ताक पर रख दिया है. आनेवाले समय में जिस तरह का नजीर पेश किया गया है, बीजेपी को देश की जनता नहीं छोड़ेगी.

स्पीकर कोर्ट के फैसले पर बाबूलाल ने खड़ा किया सवाल

बाबूलाल ने स्पीकर कोर्ट के फैसले पर भी सवाल खड़ा किया. कहा कि स्पीकर ने संविधान और कानून को ताक पर रखकर बीजेपी के पक्ष में फैसला दिया है. झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के छह विधायकों को प्रलोभन देकर बीजेपी में शामिल कराया. इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पार्टी की ओर से छह विधायकों की सदस्यता समाप्त करने को कहा गया था, लेकिन इस मामले को चार साल तक लटकाये रखा गया. जब फैसला आया, तो 10वीं संविधान का उल्लंघन कर फैसला सुनाया गया.

बाबूलाल ने नियमों का भी दिया हवाला

बाबूलाल ने कहा कि 10वीं अनुसूची के पैरा दो में सदन में किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य चुने जाते हैं, तो उसमें साफ लिखा है कि जनता जिस दल से प्रतिनिधि का चयन करती है, तो उसी दल में पांच साल तक रहेंगे. छह विधायक कंघी छाप सिंबल से निर्वाचित हुए थे. लेकिन, विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता समाप्त नहीं की. जब छह विधायक बीजेपी में चले गये, तो उन लोगों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा. पत्र में कहा गया कि झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) राजनीतिक पार्टी का बीजेपी में पूर्ण विलय हो गया है. यह विलय व्यापक राज्य हित को देखते हुए हुआ है. स्पीकर से आग्रह किया गया था कि सदन में सत्ता पक्ष की ओर बैठने के लिए जगह आवंटित करें. इसी तरह का पत्र तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र राय ने भी विधानसभा अध्यक्ष को लिखा था.

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