
Hazaribaug: हजारीबाग जिले का बड़कागांव एक बार फिर सुर्खियों में है. न्यायालय के ताजा फरमान से जहां बड़कागांव गोली कांड के पीड़ितों को न्याय की आस जगी है, वहीं कई अधिकारियों के होश फाख्ता हैं. हाइकोर्ट के आदेश ने प्रशासनिक गलियारों मे हलचल मचा दिया है. दरसअल झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश दिया है की चिरूडीह गोलीकांड में एनटीपीसी के जीएम, एएसपी, डीएसपी और सीओ सहित 25 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए. इस आदेश के आलोक मे बड़कागांव थाने में हत्या की एफआईआर दर्ज की गई है. इस गोलीकांड में चार युवकों अभिषेक राय, महताब आलम, पवन साव और रंजन राम की मौत हो गई थी.
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डेढ़ साल तक थाने में लटकी रही फाइल
झारखंड हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट की सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया गया. गोली कांड में अभिषेक की मौत हो गई थी, और उनके पिता ने एसडीजेएम हजारीबाग कोर्ट में परिवाद दायर किया था. इस पर कोर्ट ने पुलिस को केस दर्ज कर सूचित करने को कहा था. लेकिन परिवाद की फाइल डेढ़ साल तक थाने मे केस दर्ज नही हुई. इसके बाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दायर की गई. हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब-तलब किया. इसके बाद पुलिस हरकत में आई और बड़कागांव थाने में कांड संख्या 106/18 के तहत धारा 302 व 32 के तहत एफआईआर दर्ज की.
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इन अधिकारियों पर दर्ज हुई एफआईआर
बड़कागांव थाने में जिन अधिकारियों पर केस दर्ज हुआ है, वे हैं- एनटीपीसी के तत्कालीन जीएम टी गोपाल कृष्णा, एएसपी अभियान कुलदीप कुमार, डीएसपी प्रदीप पाल कच्छप, सीओ शैलेश कुमार, त्रिवेणी सैनिक माइनिंग कंपनी के निदेशक श्रीनिवासन, प्रबंधक बी प्रभाकरण, सुरक्षा प्रभारी व पूर्व डीएसपी एसडी सिंह उर्फ सत्येंद्र सिंह, निदेशक डीआरडीए एनबी प्रभाकर, इंस्पेक्टर अखिलेश सिंह, थाना प्रभारी अकील अहमद, एनटीपीसी के एजीएम एसके तिवारी और बी बी महापात्रा
यह है पूरा मामला
- त्रिवेणी सैनिक कंपनी के खनन कार्य और 2013 भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा देने और नौकरी की मांग को लेकर 15 सितंबर को कफन सत्याग्रह की शुरुआत विधायक निर्मला देवी व योगेंद्र साव के नेतृत्व में हुई.
- 17, 18 व 19 सितंबर को पूर्व मंत्री योगेंद्र साव धरने में शामिल रहे. 22 सितंबर को उपायुक्त वार्ता को पहुंचे, लेकिन वार्ता विफल रही. खनन कार्य रोके जाने से इनकार किया गया.
- 28 सितंबर को खनन कार्य के लिए जा रहे वाहन को रोका गया, विधायक ने बदसलूकी का भी आरोप लगाया.
- 29 सितंबर को एनटीपीसी ने विधायक व उसके समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया.
- एक अक्टूबर 2016 को पुलिस ने निर्मला देवी को हिरासत ले लिया. लेकिन समर्थकों ने विधायक को पुलिस से छुड़ा लिया. इससे मामला भड़क गया, पुलिस और आंदोलन कर रहे लोगों में झड़प हो गई. भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया तो पुलिस ने फायरिंग की. इसमें चार युवकों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए.
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