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#NRC_CAA साथ मिलकर भारतीय मुसलमानों के दर्जे को प्रभावित कर सकते हैं : रिपोर्ट

 CAA पर CRS की यह पहली रिपोर्ट है। इसमें कहा गया, संघीय सरकार की NRC की योजना को CAA के साथ लाने से भारत के लगभग 20 करोड़ मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दर्जा प्रभावित हो सकता है.

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Washington :  कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (CRS) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा संशोधित नागरिकता कानून (CAA) को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के साथ लाने से भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दर्जा प्रभावित हो सकता है. यह रिपोर्ट 18 दिसंबर को आयी.  इसमें कहा गया कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार देश की नागरिकता संबंधी प्रक्रिया में धार्मिक पैमाने को जोड़ा गया है.

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20 करोड़ मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दर्जा प्रभावित हो सकता है

CRS  अमेरिकी कांग्रेस की एक स्वतंत्र शोध इकाई है जो घरेलू और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करती है ताकि सांसद उनसे जुड़े फैसले ले सकें.  लेकिन इन्हें अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं माना जाता है.
CAA पर CRS की यह पहली रिपोर्ट है। इसमें कहा गया, संघीय सरकार की NRC की योजना को CAA के साथ लाने से भारत के लगभग 20 करोड़ मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दर्जा प्रभावित हो सकता है.

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गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान

CAA  के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से बच कर 31 दिसंबर 2014 तक भारत आये गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. CRS ने दो पन्नों की अपनी रिपोर्ट में कहा, भारत का नागरिकता कानून 1955 अवैध प्रवासियों के नागरिक बनने को प्रतिबंधित करता है.  तब से इस कानून में कई संशोधन किये गये लेकिन उनमें से किसी में भी धार्मिक पहलू नहीं था.

CRS का दावा है कि संशोधन के मुख्य प्रावधान जैसे कि तीन देशों के मुस्लिमों को छोड़कर छह धर्मों के प्रवासियों को नागरिकता की अनुमति देना भारत के संविधान के कुछ अनुच्छेद खासकर अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन कर सकता है.
इसमें कहा गया, कानून के समर्थकों का तर्क है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान में मुस्लिमों को उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ता है और CAA संवैधानिक है क्योंकि यह भारतीय नागरिकों नहीं प्रवासियों से संबंधित है.

30 may to 1 june

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