
Ranchi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष तौर पर काम करेगा. इसके लिए वह 13 से 27 अप्रैल तक भूमि सुपोषण अभियान चलाने वाला है. यह निर्णय पिछले दिनों बेंगलुरु में हुई संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि संभा की बैठक में लिया गया है.
मंगलवार को रांची के संघ कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में संगठन के सह प्रांत कार्यवाह राकेश लाल ने कहा, “संघ आने वाले समय में ग्राम विकास गतिविधि द्वारा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए रसायन मुक्त कृषि क्षेत्र में विशेष कार्य का आरंभ करेगा. 13 से 27 अप्रैल तक भूमि सुपोषण अभियान चलाया जायेगा.” उन्होंने बताया कि भूमि सुपोषण का अर्थ है मृदा में आवश्यक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए काम किया जाये.
लाल ने बताया कि संघ का उद्देश्य भेदभाव रहित हिंदू समाज का निर्माण करना है और वर्तमान में विशेष रूप से परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता की गतिविधियों को विशेष रूप से आगे बढ़ाया जायेगा.
अगले तीन सालों में हर मंडल तक पहुंचेगा संघ
प्रेसवार्ता में राकेश लाल ने बताया कि कि अगले तीन वर्षों में भारत में संघ कार्य को हर मंडल तक पहुंचाने की योजना है. इस हिसाब से 58 हजार मंडलों तक संघ कार्य पहुंचाने को लेकर योजना बनी है.
उन्होंने कहा, “कोरोना संकट के कारण दीवाली तक शाखा नहीं लग सकी थी. उसके पश्चात आवश्यक गाइडलाइन का पालन करते हुए धीरे-धीरे शाखाएं प्रारंभ हुईं. झारखंड में 482 स्थानों के 96% और 724 शाखाओं में से 87% शाखा प्रारम्भ हो चुकी है. 258 खण्डों में 72% खण्ड और 1264 मंडलों में से 26% कार्ययुक्त तथा 17% सम्पर्कयुक्त है. शेष तीन वर्षों में कार्ययुक्त करने की योजना है.”
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आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा राम मंदिर से जुड़ा हर कार्य
राकेश लाल ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का सर्वसम्मत निर्णय, उसके बाद श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र’ का गठन, अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने हेतु किया गया अनुष्ठान एवं निधि समर्पण अभियान भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम पृष्ठ बन गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा.
उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 44 दिन तक चले निधि समर्पण अभियान को विश्व इतिहास का सबसे बड़ा संपर्क अभियान बताया और कहा कि इस अभियान ने एक बार पुनः यह सिद्ध किया है कि संपूर्ण देश भावात्मक रूप से सदैव श्रीराम से जुड़ा हुआ है.
उन्होंने कहा कि लगभग 5.5 लाख से अधिक नगर-ग्रामों के 12 करोड़ से अधिक रामभक्त परिवारों ने भव्य मंदिर निर्माण के लिए अपना समर्पण किया है जिसमें समाज के सभी वर्गों और मत-पंथों के लोग शामिल हैं.
उन्होंने बताया कि झारखंड में 23467 गांव के 3408784 परिवारों से प्रत्यक्ष सम्पर्क किया गया और इस भावनात्मक कार्य में कुल 25868 पुरुष और 3218 महिलाओं (कुल 29086) कार्यकर्ताओं की प्रत्यक्ष भागीदारी रही.
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कोविड संकट में भारत ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का निर्वाह किया
प्रेसवार्ता में सह प्रांत कार्यवाह ने प्रतिनिधि सभा की ओर से कहा कि कोविड-19 के वैश्विक संकट में भारत ने अपनी ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की परंपरा के अनुरूप प्रारंभिक काल में हाइड्रोक्सिक्लोरोक्विन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से लेकर ‘वैक्सीन-मैत्री’ तक के माध्यम से विश्व के अनेकानेक देशों की ओर सहयोग का हाथ बढ़ाया, जिसकी विश्व के अनेक नेताओं व देशों द्वारा प्रशंसा की गयी.
लाल ने बताया कि कोरोना काल में स्वयंसेवकों ने देशभर में सेवा भारती के माध्यम से 92,656 स्थानों पर सेवा कार्य किये. इसमें 5,60,000 कार्यकर्ता सक्रिय रहे. उन्होंने कहा कि केवल संघ नहीं, समाज के अनेक संगठनों, मठ, मंदिर, गुरुद्वारों ने भी समाज की खूब सेवा की.
उन्होंने बताया कि संघ के स्वयंसेवकों ने झारखंड में भी अद्वितीय सेवा की. कुल 5730 सेवा स्थानों पर 77476 सेवारत कार्यकर्ताओं द्वारा 85465 राशन किट, 494817 तैयार भोजन पैकेट, 167580 मास्क, 78305 सेनेटाइजर व साबुन, 10243 दूध पैकेट, 783 रक्तदान, 44233 पैकेट आयुर्वेदिक काढ़ा का वितरण किया गया.
इसके अलावा जनजागरण हेतु 6348 स्थानों पर दीवार लेखन, 22640 करपत्रक वितरण, 27749 शारिरिक दूरी चिन्ह सहित प्रवासी जनों के लिए 186 भोजन वितरण केंद्र, 22 स्वास्थ्य केंद्र एवं 114 रेलवे और बस स्थानकों पर सहायता की गयी. इस दौरान 2563 घुमन्तु बन्धुओं का भी सहयोग किया गया.
पत्रकार वार्ता में सह प्रांत संघचालक मा अशोक कुमार श्रीवास्तव, प्रान्त प्रचारक दिलीप कुमार, प्रान्त प्रचार प्रमुख धनंजय कु सिंह, प्रान्त ग्राम विकास प्रमुख महेंद्र प्रसाद उपस्थित थे.
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