
Mumbai : 2008 में हुए मालेगांव धमाके के सभी आरोपियों को मुंबई में एनआईए की विशेष अदालत ने हफ्ते में एक बार अदालत में पेश होने के लिए कहा है. आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और अन्य शामिल हैं. अदालत ने उनके कोर्टरूम में मौजूद न होने पर निराशा जताई. मामले में 20 मई को अगली सुनवाई होगी. इससे पहले एनआईए कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित द्वारा दस्तावेज प्राप्त करने के लिए दाखिल याचिका को खारिज कर दिया था.
अदालत ने कहा था कि यह ट्रायल को लंबा खींचने के लिए आवेदक का यह गोपनीय एजेंडा है. बता दें कि पुरोहित ने अपनी याचिका में एटीएस और एनआईए चार्जशीट के सभी गवाहों के बयान मांगे थे.
इसे भी पढ़ेंःआम चुनाव 2019 के लिए आज प्रचार का आखिरी दिन, 19 मई को 8 राज्यों की 59 सीटों पर होगी वोटिंग
29 सितंबर 2008 को रमजान के दौरान सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे
बता दे कि 29 सितंबर 2008 को रमजान के दौरान मालेगांव के अंजुमन चौक और भीखू चौक पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. जिसमें छह लोगों की मौत हुई जबकि 101 लोग घायल हुए थे. इन धमाकों की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी। उनके अनुसार धमाकों में एक मोटरसाइकिल प्रयोग की गई थी, जिसके बारे में ये खबर आई थी कि वो मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर थी.
इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अन्य लोग अभियुक्त बनाए गए थे। बाद में इस जांच को भी महाराष्ट्र एटीएस से एनआईए ने अपने पास ले लिया था. 13 मई 2016 को एनआईए ने एक नई चार्जशीट में रमेश शिवाजी उपाध्याय, समीर शरद कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावड़े, जगदीश महात्रे, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी दयानंद पांडे सुधाकर चतुर्वेदी, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया.
इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शिव नारायण कालसांगरा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा, धानसिंह चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं होने की बात कही गई. दिसंबर 2017 में मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून) हटा लिया गया.
इसे भी पढ़ेंःबाल-बाल बचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, गाय को बचाने के दौरान पलटी गाड़ी




