
Ranchi : 3 लाख 70 हजार से अधिक विचाराधीन कैदी देश भर की जेलों में बंद हैं. इनमें झारखंड के 17 हजार से अधिक कैदी शामिल हैं. उक्त आशय की जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्र ने लोकसभा में सांसद संजय सेठ के सवाल के जवाब में दी.
सांसद ने भारत के कारावास में विचाराधीन कैदियों के साथ सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए उठाये जाने वाले कदम के बारे में सवाल पूछा था. सांसद ने यह भी पूछा था कि 5 से 10 वर्षों से अधिक समय से कारावास में रह रहे विचाराधीन कैदियों के संबंध में सरकार क्या विचार कर रही है?

कारागार कैदियों का एवं प्रबंधन राज्य सरकारों की जिम्मेदारी :
इसके जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ऐसे आंखों को संग्रहित व संकलित करने का काम करता है. कानून की उपयुक्त प्रक्रिया का पालन करने के बाद न्यायालयों के आदेश के अनुसार विचाराधीन कैदियों को कारागार में रखा जाता है. कारागार में बंद व्यक्ति राज्य के विषय हैं. कारागार कैदियों का एवं प्रबंधन राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है. जो सामाजिक दृष्टि से पिछड़े कैदियों सहित सभी कारागार कैदियों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त नीतियों को तैयार कर उनका कार्यान्वयन करने के लिए सक्षम है.
जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के मुद्दे का समाधान करने के लिए विभिन्न पहल की है :
गृह मंत्रालय ने देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के मुद्दे का समाधान करने के लिए विभिन्न पहल की है. केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए उपाय करने के लिए राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों को कई दिशा निर्देश जारी किये गये हैं.
सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को आदर्श कारागार मैनुअल के अंतर्गत कानूनी सहायता पर एक अध्याय दिया गया है, जिसमें विचाराधीन व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं, कानूनी बचाव, वकीलों के साथ साक्षात्कार, सरकारी खर्चे पर कानूनी सहायता के लिए प्रावधान किये गये हैं.
इसके अतिरिक्त किसी विचाराधीन कैदी को उसके लिए निर्धारित की गयी अधिकतम कारावास की अवधि की आधी अवधि की सजा काट लेने पर, उसे जमानत पर रिहा करने का भी प्रावधान किया गया है. प्ली बारगेनिंग का एक नया अध्याय जोड़ कर प्ली बारगेनिंग की अवधारणा भी शुरू की गयी, जो प्रतिवादी और अभियोजन पक्ष के बीच विचारण पूर्व बातचीत की सुविधा प्रदान करता है. इसके अतिरिक्त उन कैदियों की पहचान करने में विचाराधीन कैदी समीक्षा समिति भी सहयोग करती है.
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा ने मानक प्रचालन प्रक्रिया तैयार की है :
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा ने मानक प्रचालन प्रक्रिया तैयार की है. गृह मंत्रालय द्वारा यह सोपी सभी राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों को भी परिचालित की गयी है. इसके अतिरिक्त जेलों में लगभग 1091 विधिक सेवा क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, जिन्हें पैनल में शामिल विधिक सेवा अधिवक्ताओं और प्रशिक्षित प्राविधिक स्वयंसेवकों के द्वारा संचालित किया जाता है.
गृह मंत्री ने बताया कि वर्तमान स्थिति के अनुसार देश भर की जेलों में 371848 विचाराधीन कैदी बंद है. वहीं झारखंड में 17103 विचाराधीन कैदी बंद है. सबसे कम लक्षद्वीप में महज दो विचाराधीन कैदी बंद हैं, वहीं पड़ोसी राज्य बिहार में 44187 विचाराधीन कैदी जेलों में सजा काट रहे हैं.





