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मूडीज ने भारत की रेटिंग BAA2 से घटाकर की BAA3, इसके नीचे कबाड़ वाली रेटिंग ही बचती है

New Delhi: रेटिंग एजेंसी Moodys मूडीज़ इनवेस्टर्स सर्विस ने सोमवार को भारत की सावरेन (राष्ट्रीय) रेटिंग को ‘बीएए2’ से घटाकर ‘बीएए3’ कर दिया. (BAA2 – BAA3) एजेंसी का कहना है कि लो इकोनॉमिक ग्रोथ और बिगड़ती वित्तीय स्थिति के चलते जोखिम कम करने वाली नीतियों से निपटने में चुनौतियां खड़ी होंगी.

नोटबंदी के बाद से आर्थिक विशेषज्ञ भारत के जिन हालातों को लेकर पिछले चार साल से मोदी सरकार को अलर्ट कर रहे थे और सरकार उनकी बातों को अनसुनी करती रही है, मूडिज की ताजा रिपोर्ट उसे पुष्ट कर रही है. तीन दिन पहले भी भारत सरकार ने वर्ष 2019-20 का जो आंकड़ा जारी किया था, उसमें भी चौथी तिमाही में भारत का जीडीपी मात्र 3.1 प्रतिशत बताया गया था.  

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क्या कहना है एजेंसी का

एजेंसी ने एक स्टेटमेंट में कहा है कि मूडीज ने सोमवार को भारत सरकार की फॉरेन करेंसी और लोकल करेंसी लांग टर्म इशुअर रेटिंग बीएए2 से घटाकर बीएए3 कर दिया है.

‘बीएए3’ सबसे निचली निवेश ग्रेड वाली रेटिंग है. इसके नीचे कबाड़ वाली रेटिंग ही बचती है. एजेंसी ने कहा कि मूडीज ने भारत की लोकल करेंसी सीनियर अनसिक्योर्ड रेटिंग को भी बीएए2 से घटाकर बीएए3 कर दिया है. इसके साथ ही शॉर्ट टर्म लोकल करेंसी रेटिंग को भी पी-2से घटाकर पी-3 पर ला दिया गया है.

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नवंबर 2017 में 13 साल के बाद रेटिंग को किया था बीएए2

मूडिज ने कहा है कि नकारात्मक आउटलुक में अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में गहरा दबाव दिखायी देता है जिसके और नीचे जाने का जोखिम है. यह स्थिति मूडीज के मौजूदा अनुमान के मुकाबले वित्तीय मजबूती को अधिक गहरा और लंबा नुकसान पहुंचा सकती है.

मूडीज ने इससे पहले नवंबर 2017 में 13 साल के बाद भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान चढ़ाकर बीएए2 किया था. 

अब देश को यह बात समझ लेनी चाहिये कि मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों ने हमें किस स्तर पर पहुंचा दिया है. जब सरकार को दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों की सलाह को मान कर सुधारात्मक कदम उठाने चाहिये थे, तब मोदी सरकार देश को धारा 370, सीएए, एनआरसी, पाकिस्तान, हिन्दु-मुस्लिम में उलझायी हुई थी. लेकिन अब हालात बेकाबू हो गये हैं. अब भारत सरकार खराब आर्थिक हालात और अपनी कंगाली के लिये कोरोना को बहाने के रुप में इस्तेमाल कर रही है.

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