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गैर जघन्य अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को रिहा करेगी मोदी सरकार

बुजुर्ग नागरिक, महिलाएं, ट्रांसजेंडर, विकलांग और ऐसे कैदी जिनकी बीमारी के चलते मौत होने वाली है

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New Delhi: नरेन्द्र मोदी सरकार ऐसे कैदियों को रिहा करेगी, जिन्हे गैर जघन्य अपराधों के लिए जेल में रखा गया है. और ऐसे कैदी कम से कम सजा की आधी अवधि गुजार चुके हैं. बुधवार को मोदी कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया.

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कौन-कौन होगे जेल से आजाद ?

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर की माने तो कुल तीन चरणों में कैदियों की रिहाई होगी. पहले चरण में बुजुर्ग नागरिक, विकलांग और वैसे कैदी जिन्हे गंभीर बीमारी है और वे मरने वाले हैं.

दूसरे चरण में गैर जघन्य अपराधों की सजा काट रहे महिलाएं और ट्रांसजेंडरों को आजाद किया जाएगा.

तीसरे चरण में मामूली अपराधी जैसे बकरी चोरी, जंगल से छोटे पेड़ काटने वालों, मामूली चोरी जैसे क्षम्य अपराधों वाली सूची के कैदियों के रिहा किया जाएगा.

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रिहा कर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देगी मोदी सरकार

मोदी सरकार एक वर्ष तक महात्मा गांधी की जयंती मनाने जा रही है. कैदियों की रिहाई के लिए जिन तारीखों का चुनाव किया गया है,वे गांधीजी से जुड़े हुए हैं. पहले चरण के कैदियों को इसी साल दो अक्टूबर को रिहा किया जाएगा. इसी दिन देश गांधी जयंति मनाता है. दूसरे चरण के कैदियों को अगले साल 10 अप्रैल यानि चंपारण सत्याग्रह के दिन रिहा किया जाएगा. आखिरी चरण के कैदियों की रिहाई दो अक्टूबर 2019 को होगी.

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गंभीर अपराध में सजा काट रहे अपराधियों की रिहाई नहीं

फांसी या उम्रकैद की सजा पाये किसी भी अपराधी की रिहाई नहीं होगी. इसके अलावा दहेज, बलात्कार, मानव तस्करी जैसे मामलों में सजा पाये अपराधियों की भी रिहाई नहीं होगी. बैंक फ्रॉड, ठगी करने वाले अपराधियों को भी रिहा नहीं किया जाएगा. ये जानकारी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दी. उन्होने कहा कि पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पॉक्सो, हवाला, फेमा, एनडीपीएस और भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत सजायाफ्ता लोगों को भी राहत नहीं मिलेगी.

केन्द्र ने राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों को जारी करेगी एडवाइजरी

केन्द्र सरकार जल्द ही सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारों को एडवाइजरी जारी करेगी. हर राज्य सरकार को अपने यहां एक समिति का गठन करना है. समिति ही तय करेगी कि किन कैदियों को रिहा करना है और किनको नहीं. समिति अपनी सिफारिश राज्यपाल को भेजेगी. राज्यपाल की मंजूरी के बाद ही कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हो सकेगा.

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