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जेबीवीएनएल में हुआ है 15 करोड़ का टीडीएस घोटाला, न्यूज विंग की खबर पर ऊर्जा विभाग की मुहर

ऊर्जा विभाग ने श्री चटर्जी को लिखा है कि जेबीवीएनएल में 2009-2010 में डीटीएस घोटाला हुआ था

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: तीन जुलाई को न्यूज विंग ने एक खबर छापी थी. खबर का शीर्षक था “जेबीवीएनएल में 15 करोड़ का टीडीएस घोटाला”. विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान ऊर्जा विभाग ने यह मान लिया है कि जेबीवीएनएल में 2009-10 में 15 करोड़ की टीडीएस घोटाला हुआ था. न्यूज विंग की हर उस बात पर ऊर्जा विभाग ने मुहर लगायी है, जिसे खबर में लिखा गया था. निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने मामले को लेकर विधानसभा में सवाल किए. सवाल के जवाब में ऊर्जा विभाग ने श्री चटर्जी को लिखा है कि जेबीवीएनएल में 2009-2010 में डीटीएस घोटाला हुआ था, और उसकी जल्द से जल्द जांच कर दोषियों को पहचान कर कार्रवाई की जाएगी.

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क्या थे विधायक अरुप के सवाल और विभाग ने क्या दिया जवाब

न्यूग विंग में खबर छपने के बाद निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने विभाग को मामले से जुड़े सवाल किए.

जेबीवीएनएल में हुआ है 15 करोड़ का टीडीएस घोटाला, न्यूज विंग की खबर पर ऊर्जा विभाग की मुहर

पहला सवाल : क्या यह सही है कि जेबीवीएनएल के गठन से पहले 2009-10 में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण के लिए 8 निजी कंपनियों को काम सौंपा गया था. उस काम के एवज में जब आखिरी भुगतान विभाग की तरफ से कंपनियों को कराया गया तो बिना टीडीएस कोड के ही विभाग ने इन कंपनियों को 15 करोड़ का टीडीएस सर्टिफिकेट दे दिया.

विभाग का जवाब : साल 2006-07 में राज्य की ग्रामीण विद्युतीकरण का काम 4 निजी कंपनियों को सात पैकेज का काम सौंपा गया था. कंपनियों को अभी तक आखिरी भुगतान नहीं किया गया है.

दूसरा सवालः क्या यह सही है कि आयकर विभाग ने बोर्ड को 15 करोड़ की टीडीएस राशि को संबंधित कंपनियों से वसूलने और आयकर विभाग में जमा करने का नोटिस दिया था. लेकिन  बोर्ड ने अपने फंड से ही आयकर विभाग को टीडीएस की राशि जमा करवा दी.

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विभाग का जवाबः 2008-09 में आयकर विभाग ने सर्वे किया था. जिसमें विद्युतीकरण योजना में साल 2006-07 से लेकर सर्वे की तिथि तक किए गए सामग्रियों की आपूर्ति पर भुगतान की राशि का 2% की दर से टीडीएस जमा करने को कहा था. आयकर विभाग ने टीडीएस की राशि नहीं जमा करने की स्थिति में दंडनात्मक ब्याज, जुर्माना और अभियोजन तथा बोर्ड के बैंक खातों को जब्त करने की चेतावनी भी दी थी. 2006-07 तक कंपनियों को अधिकतम भुगतान कर दिया गया था, साथ ही उस वक्त कंपनियों का बिल भी उपलब्ध नहीं था. ऐसे में एसीएईटी, टीडीएस सर्कल, रांची (आयकर विभाग) के आदेश के अनुसार टीडीएस की राशि ग्रामीण विद्युतीकरण योजना मद की राशि से जमा कर दी गई. जिससे भविष्य में निजी कंपनियों से मैनेज करना था. लेकिन अभी तक यह राशि कंपनियों से नहीं वसूली गयी है.

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तीसरा सवालः क्या यह बात सही है कि यह मामला जेबीवीएनएल गठन के बाद बोर्ड के सीएमडी आरके श्रीवास्तव के संज्ञान में आया. उन्होंने बोर्ड के नियम के विरुद्ध इस काम से हुए 15 करोड़ की राजस्व नुकसान की जांच के लिए बोर्ड के एमडी और जीएम एचआर को 29.02.2017 को एक पत्र लिखकर इस मामले की जांच विजिलेंस की टीम बनवाकर करवाने के लिए कहा था. लेकिन इन विषयों पर आज यानि 3.07.2018 तक कोई भी कार्यवाही नहीं हो पायी है.

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विभाग का जवाबः स्वीकारात्मक है. मतलब विभाग ने माना कि ऐसा हुआ था. और जेबीवीएनएल की तरफ से किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई. सीएमडी की चिट्ठी को दबा दिया गया. ना तो MD ने और ना ही जिएए एचआर ने सीएमडी के निर्देश के बाद किसी तरह की कोई कार्रवाई की.

चौथा सवालः अगर सभी सवाल सही हैं, तो क्या सरकार इस विषय पर एक उच्च स्तरीय समिति से जांच करवाकर दोषियों पर आवश्यक कानूनी कार्यवाई करने का विचार रखती है. हां तो कब तक नहीं तो क्यों.

विभाग का जवाबः इस पूरे प्रकरण की जांच कराते हुए दोषी व्यक्तियों को दोषी व्यक्तियों की पहचान कर आवश्यक कार्यवाई शीघ्र ही की जाएगी.

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मामले पर क्या कहा था जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार ने

खबर छापने से पहले जब न्यूज के संवाददाता इन सवालों के साथ जेबीवीएनएल के एमडी राहुल पुरवार के पास पहुंचे तो उन्होंने मामले पर किसी भी तरह की जानकारी देने से मना कर दिया. पूछे जाने पर कहते हैं, कि पहले कागजात दिखायें और सोर्स बतायें कि यह सब जानकारी आपको किसने दी.

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