
New Delhi: जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं. राम मंदिर को लेकर हलचल बढ़ती जा रही है. पिछले सप्ताह जहां मोदी सरकार ने बड़ा दांव चलते हुए गैर विवादित 67 अकड़ भूमि वापस लौटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. वहीं सोमवार को इस याचिका को चुनौती दी गई है. अब इस अर्जी के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका डाली गई है. याचिकाकर्ता ने लैंड ऐक्विजिशन एक्ट की वैधता पर सवाल उठाया.
स्वयं को राम लला का भक्त बताने का दावा करने वाले वकीलों के एक समूह ने यह याचिका दायर की है. इस याचिका में दलील दी गयी है कि संसद राज्य की भूमि का अधिग्रहण करने के लिये कानून बनाने में सक्षम नहीं है. याचिका में कहा गया है कि राज्य की सीमा के भीतर धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के लिये कानून बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल के पास है.
ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने 67 एकड़ गैर-विवादित जमीन मूल मालिकों को लौटाने के लिए अर्जी दी थी. राम जन्मभूमि न्यास ने सरकार के इस कदम का स्वागत भी किया था. वहीं इस मामले पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को ही एक कार्यक्रम में सभी दलों से इस पर सहयोग की मांग की थी. इधर अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल के पास की भूमि अधिग्रहण करने संबंधी 1993 के केन्द्रीय कानून की संवैधानिक वैधता को सोमवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी. ज्ञात हो कि इस जमीन का अधिग्रहण 1993 में कांग्रेस की तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने किया था.
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