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मंत्री आलमगीर आलम ने मनरेगा कर्मियों को दिया भरोसा, दुर्गापूजा से पहले मिल सकती है PF की सुविधा

सामाजिक सुरक्षा औऱ बर्खास्तगी के विरुद्ध अपील करने का भी मिलेगा अधिकार

Ranchi.  मनरेगा कर्मियों के मामले में सरकार गंभीर है. 10 सितंबर को उनके साथ हुए एग्रीमेंट को पूरा करने को लेकर जल्दी ही ऑफिशियल नोटिफेशन जारी होगा. ग्रामीण विकास औऱ पंचायती राज मंत्री आलमगीर आलम ने मनरेगा कर्मचारी संघ को इसके लिए भरोसा दिलाया है.

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सोमवार को संघ के साथ हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा से पहले कैबिनेट की बैठक में समझौते को फाइनल टच दे दिये जाने का प्रयास है. जिन 3 बिंदुओं पर सहमति बनी थी. उसे ऑफिशियली लिखित तौर पर जारी कर दिया जायेगा.

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मनरेगा कर्मियों के हितों की होगी रक्षा

आलमगीर आलम ने संघ को जानकारी दी कि सीएम हेमंत सोरेन अनुबंध कर्मियों के मसले पर गंभीर हैं. सरकार ऐसे कर्मचारियों के हित में योजना बना रही है. मनरेगा कर्मियों के लिए भी जल्दी ही बेहतर प्रयास होगा. कोरोना काल के कारण राजस्व औऱ कोष की हालत नाजुक है. बावजूद इसके हम सब मिलकर अनुबन्धकर्मियों का हित साधने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मनरेगा योजनाओं को गति देने में सब मिलकर काम करें.

अधिकारियों का रवैया निराशाजनक

झारखण्ड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को आलमगीर आलम से भेंट कर समझौतों को जल्दी से लागू करने का आग्रह किया. प्रदेश उपाध्यक्ष महेश सोरेन ने कहा कि संघ के एक पदाधिकारी सुशील कुमार पांडेय को विभागीय पदाधिकारियों द्वारा जान बूझकर परेशान किया जा रहा है.

प्रदेश सचिव राजेश दास को को हड़ताल में शामिल होने के कारण अपने गृह प्रखंड से 80 किमी दूर ट्रांसफर कर दिया गया. यह नियमों के खिलाफ है. गिरिडीह, चतरा, रामगढ़, पाकुड़ हजारीबाग सहित राज्य के विभिन्न जिलों में छोटी-छोटी गलतियों के नाम पर कई कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गयी है. ऐसे मामलों में फिर से जांच कराकर निर्दोषों को फिर से सेवा में रखा जाये.

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क्या हुआ है समझौता

ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा कर्मियों के हित में 3 प्रमुख कामों को अंतिम रूप देने में लगा है. इसमें सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलनेवाली सहायता, कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मियों की बर्खास्तगी के बाद अपील किये जाने का मौका दिये जाने का मामला खास है. काम के दौरान घायल होने पर ईलाज के लिए मनरेगा कर्मियों को 50,000 रुपये तक की मदद मिलेगी.

इसी तरह काम के दौरान दुर्घटना में मारे जाने पर 5 लाख की सहायता उनके परिजनों को दी जायेगी. कर्मियों को ईपीएफ का लाभ भी मिलेगा. इसके तहत कर्मचारी को 12 प्रतिशत अंशदान करना है. नियोक्ता की ओर से 13 प्रतिशत रहेगा. यानि कुल 25% का लाभ ईपीएफ के तौर पर मिलेगा. जिला स्तर पर किसी कर्मी को हटाने से पहले उससे स्पष्टीकरण पूछना जरूरी होगा. सेवा से हटाये जाने की स्थिति में कर्मी एक महीने के भीतर प्रमंडलीय आयुक्त के पास लिखित तौर पर अपील कर सकेगा.

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