
- NCPCR सदस्य यशवंत जैन ने बाल विवाह को बताया गंभीर समस्या
Ranchi : बाल विवाह की समस्या पर शुक्रवार को वेबिनार का आयोजन हुआ. इसमें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सदस्य यशवंत जैन ने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए जागरूकता बहुत ही जरूरी है. यह ऐसी समस्या है, जिसे सामूहिक प्रयास से ही रोका जा सकता है.
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छठी कक्षा से ही बच्चों को जागरूक करने की जरूरत
जैन ने कहा कि छठी कक्षा से ही बच्चों को बाल विवाह की समस्या के बारे में जागरूक करना चाहिए. बच्चों के बीच वह समझ पैदा करनी चाहिए कि वे बाल विवाह के नुकसान के बारे में जान सकें. उन्होंने कहा कि इस वेबिनार के माध्यम से आनेवाले सुझावों को वह आयोग के साथ साझा करेंगे, ताकि इसकी रोकथाम के लिए रणनीति बनायी जा सके. आयोग की कोशिश है कि 2030 तक देश से बाल विवाह की समस्या खत्म हो सके.
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10 जिलों में 68 बाल विवाह रोके गये : संजय
बाल कल्याण संघ झारखंड के सचिव सह राष्ट्रीय एक्शन को-ऑर्डिनेशन समूह के कोषाध्यक्ष संजय मिश्रा ने कहा कि बाल विवाल एक गंभीर समस्या है. इसे रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि कोरोना काल में झारखंड के 10 जिलों में 68 बच्चों का विवाह रोका गया है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बच्चों का विवाह होता रहा, यह चिंताजनक है.
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विवाह के नाम पर बढ़ी है बच्चों की तस्करी : अभिजीत
टाटा ट्रस्ट के एडवोकेसी को-ऑर्डिनेटर अभिजीत निर्मल ने कहा कि विवाह के नाम पर बच्चों की तस्करी बढ़ी है. गर्ल्स नोट ब्राइट संस्था की दिव्या मुकुंद ने कहा कि गांवों में यह भी होता है कि बच्चे भागकर शादी न कर लें, इसलिए उनका जल्दी ही विवाह कर दिया जाता है. इस पर कानून भी कोई कार्रवाई नहीं करता है. इस समस्या को रोकने के लिए गांवों में ज्यादा काम करने की जरूरत है.
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वेबिनार में ये सुझाव आये सामने
- बाल विवाह से मुक्त बालिकाओं का पुनर्वास हो.
- बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण पर काम हो.
- बाल विवाह के खिलाफ कानून का प्रचार-प्रसार हो.
- गरीब परिवारों को सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा कानूनों से जोड़ा जाये.
- बच्चे खुद अपने बारे में निर्णय ले सकें, इसके लिए उन्हें सशक्त किया जाये.
- रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाये.
- धार्मिक गुरुओं का मंच तैयार किया जाये, ताकि बाल विवाह रुक सके.
- बाल विवाह रोकने के लिए मीडिया का सहारा लिया जाये.
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