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शुरू नहीं हो पाया मेगा फूड पार्क, अब 50 फूड प्रोसेसिंग कंपनियों की रखी गई आधारशिला

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Chandan Chaudhry

Ranchi: बड़े ही ताम-झाम के साथ फूड प्रोसेसिंग के नाम पर मेगा फूड पार्क का शिलान्यास किया गया था. सात साल के बाद 2016 में इस पार्क का उद्घाटन भी किया गया, लेकिन इसकी वर्तमान तस्वीर कई सवाल पैदा करती है. लगभग 77 करोड़ का यह प्रोजेक्ट आज खंडहर में तब्दील हो चुका है. रियाडा की 56 एकड़ में बना यह फूड पार्क खुलने से पहले ही बंद हो गया. इधर सरकार ग्लोबल फूड समिट में करोड़ों रुपए खर्च कर इंवेस्टर बुला रही है.

इंवेस्टरों को तरह-तरह का प्रलोभन दे रही है. लेकिन राज्य के सबसे बडे इस फूड पार्क को सरकार संचालित ही नहीं कर सकी. लेकिन आज फूड समिट का आयोजन कर 50 और फूड प्रोसेसिंग के लिए कपंनियों की आधारशिला रखी जा रही है. जबकि मेगा फूड पार्क उद्घाटन के बाद से ही बंद पड़ा है. मेगा पार्क के चारों तरफ लंबी-लंबी झाड़िया उग आई है. इसकी देख-रेख के लिए भी कोई नहीं है. जो भी मशीनें लगाई गई थी उसे या तो बैंक द्वारा नीलाम कर दिया गया या फिर वह चोरी हो गए.

वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज भी बना खंडहर

मेगा फूड पार्क में दो वेयर हाउस, वर्कर हॉस्टल, प्रशासनिक भवन आदि बनाये गए थे, सभी खंडहर में बदल गए है. इस मेगा फूड पार्क में फूल एसी कोल्ड स्टोरेज से लेकर, फूड टेस्टिंग लैब, पॉवर सब स्टेशन, फ्रीजर वैन सभी आधुनिक सुविधा मुहैया कराई गई थी.

सड़ रहे है एसी वाहन

फूड पार्क में सब्जियों और फल को ताजा रखने के लिए एसी वाहन की खरीददारी की गई थी. दो एसी वाहन आज भी यहां पड़े-पड़े सड़ रहे हैं. लेकिन इन्हें देखने वाला कोई नहीं है. यहां तक की फूड पार्क में कोई आपराधिक गतिविधियां न हो इसे देखने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं है. स्थानीय नागरिकों ने बताया कि 10 महीने से सुरक्षाकर्मी को वेतन नहीं दिया गया, जिस कारण वे भाग गए.

उद्घाटन के समय बदल गया था गांव का नक्शा

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उद्योग विभाग द्वारा निर्मित इस मेगा फूड पार्क उद्घाटन फरवरी 2016 में किया गया था. उद्घाटन के वक्त गेतलसूद गांव का नक्श ही बदल दिया गया था. यहां के स्थानीय नागरिक बालमुकंद बताते है कि जब फूड पार्क का उद्घाटन हो रहा था, उस वक्त गांव में रौनक थी. पीसीसी सड़क से लेकर नाली और ड्रेनेज का भी निर्माण करा दिया गया था. लेकिन जैसे-जैसे समय बिता स्थिति फिर ज्यों की त्यों हो गई. आज फिर यह गांव उपेक्षित हो चुका है.

फूड पार्क का निर्माण होने से यहां के युवाओं में भी उम्मीद जगी थी कि अब रोजगार उपलब्ध होगा. लेकिन सरकार की विफलताओं का ही नतीजा है कि करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी सरकार फूड पार्क को संचालित नहीं कर पाई. बालमुकुंद ने बताया कि रोजगार की आस में प्रतिदिन यहां के लोग रांची जाते है. फूड पार्क के शुरु होने से यहीं रोजगार मिल जाता.

इलाहाबाद बैंक से सरकार ने लिया था लोन

पार्क के निर्माण के लिए इलाहाबाद बैंक की हरमू शाखा से 33.95 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था. इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा 43 करोड़ रुपये अनुदान स्वरूप दिये गये थे. फरवरी 2016 में मुख्यमंत्री रघुवर दास इस पार्क का उद्घाटन किया था. उस वक्त खाद्या प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसीमरत कौर बादल, साध्वी निरंजन ज्योति आचार्य बालकृष्ण भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे. लेकिन इस फूड पार्क के उद्घाटन में शामिल होने वाले किसी भी अतिथि ने यह नहीं सोचा होगा की सिर्फ दो साल बाद ही यह खंडहर और विरान स्थान में बदल जायेगा.

पतंजलि के प्लांट का प्रस्ताव था

56 एकड़ के इस भूमि में कई अलग-अलग निवेशकों को इंवेस्ट का मौका दिया गया था. इसमें सबसे प्रमुख बाबा रामदेव की कंपनी पंतजलि को भी उद्योग करने के लिए आंमत्रित किया गया था. पतंजलि को 8 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया था. इसके अलावा 1 एकड़ से अधिक का एक प्लॉट रांची के ही विजय केशो इंडस्ट्रीज को आवंटित किया गया था.

इस कंपनी द्वारा काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगाया जाना था. दूसरा प्लॉट भी रांची के ही किचनमैट को आवंटित किया गया था. वहीं फसर एग्रो को 3.2 एकड़ और ग्रीन कोस्ट को 4.32 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया था. राहा इंटरप्राइजेज, सूर्या हनी एग्रो, एवीसीआइएल एग्रो व स्वदेश प्रगति को भी प्लॉट दिया गया था.

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