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मी टू… विवाद : कोंकणा, जोया और अन्य महिला निर्देशकों ने दोषसिद्ध लोगों के साथ काम नहीं करने का किया फैसला

Mumbai : भारतीय फिल्म उद्योग से महिला फिल्मकारों ने यौन उत्पीड़न की अपनी कहानियों को साझा करने वाले लोगों का समर्थन करने और दोषी साबित होने वाले किसी के साथ भी काम नहीं करने का फैसला किया है.

कोंकणा सेन शर्मा, नंदिता दास, मेघना गुलजार, गौरी शिंदे, किरण राव, रीमा कागती और जोया अख्तर जैसी कई निर्देशक उन 11 महिला फिल्म निर्माताओं में शामिल हैं. जिन्होंने भारत के मी टू अभियान को अपना समर्थन देने की प्रतिबद्धता जाहिर की है.

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महिलाओं के साथ पूरी एकजुटता के साथ हैं खड़े

निर्देशकों द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि महिला और फिल्म निर्माताओं के रूप में, हमने #मी टू इंडिया अभियान को अपना समर्थन देने का फैसला किया है. हम उन महिलाओं के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़े हैं. जो यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर पूरी ईमानदारी के साथ आगे आई हैं.

बयान में कहा गया है कि हम कार्यस्थल में सभी के लिए एक सुरक्षित और समान वातावरण बनाने में मदद के लिए जागरूकता फैलाने के लिए यहां हैं. हमने दोष साबित होने वाले लोगों के साथ काम न करने का भी रूख अपनाया है. हम उद्योग में अपने सभी सहकर्मियों से भी ऐसा करने के लिए आग्रह करते हैं.

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महिला फिल्म निर्माताओं की इस सूची में अलंकृता श्रीवास्तव, नित्या मेहरा, रूचि नारायण और सोनाली बोस शामिल हैं.

बंबई हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने भी किया था समर्थन

न्यायमूर्ति पटेल ने गुरूवार को कहा कि वह उन महिलाओं का पूरी तरह समर्थन करते हैं, जिन्होंने यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा करने और प्रताड़ित करने वालों का नाम उजागर करने का निर्णय किया है . इंडियन मर्चेंट चैम्बर की महिला शाखा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति पटेल ने अमेरिकी हास्य अभिनेता बिल कॉस्बी के मामले का हवाला दिया. बिल को 14 साल पहले की यौन हिंसा की घटना के सिलसिले में पिछले महीने सजा हुई है.

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उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन महिलाओं का पूरी तरह समर्थन करता हूं जो सामने आ रही हैं और जिनके पास बोलने का साहस है क्योंकि किसी वक्त बोलने के लिए बहुत अधिक साहस की जरूरत होती है .’’

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