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केंद्र सरकार और किसान नेताओं में बनी बात, चार मांगों पर सहमति

New Delhi: कर्ज माफी और बिजली की बढ़ी दरों को कम करने को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों और सरकार के बीच बात बनती दिख रही है. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. इस बातचीत में चार मसलों पर सररकार और किसान के बीच सहमति बनी है.

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इससे पहले हरिद्वार से दिल्ली के लिए निकले हजारों की संख्या में किसानों को दिल्ली की सीमा पर ही रोक दिया गया. इस दौरान पुलिस और किसानों में तीखी नोंक-झोक भी हुई. किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया. वही बैरिकेटिंग तोड़ने पर आमादा किसानों पर लाठीचार्ज भी किया गया. लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े रहें.

राजनाथ से की मुलाकात

किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष के बाद किसानों के प्रतिनिधियों ने दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. इस दौरान कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे. बातचीत के बाद कृषि राज्यमंत्री ने बताया कि अधिकतर मांगों पर सहमति बन गई है.  किसानों को इस बात की जानकारी दी जा रही है. किसान नेताओं से बातचीत के दौरान ही राजनाथ सिंह ने भाकियू प्रमुख नरेश टिकैत से फोन पर बात की.

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सरकार ने मानी चार मांगें

भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने गृहमंत्री के साथ बैठक के बाद कहा कि सरकार ने हमारी 4-5 मांगों को मान लिया है. इनमें मुख्य रूप से चार बातों को मान लिया गया है.

1. कृषि उपकरणों को GST के 5 फीसदी दायरे में रखा जाएगा.

2. डीजल से चलने वाले पुराने ट्रैक्टरों पर से NGT का बैन हटा दिया जाएगा.

3. एमएसपी मामले पर ये सहमति बनी है कि किसानों के उत्पाद को कम कीमत या गलत तरीके से बेचने पर रोक के लिए सरकार कानून लाएगी.

4. फसल बीमा

हालांकि, इस वार्ता में किसानों की कर्ज माफी और स्वामीनाथन रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू करने पर सहमति नहीं बन पाई है. किसान नेता ने कहा कि सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर हम लोगों के पास जाएंगे, अगर वो इसे नहीं मानते हैं तो आंदोलन जारी रहेगा.

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उल्लेखनीय है कि कर्जमाफी और बिजली बिल के दाम कम करने जैसी मांगों को लेकर किसान क्रांति पदयात्रा 23 सितंबर को हरिद्वार से शुरू हुई थी. इसके तहत बड़ी संख्या में किसान भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और मेरठ जिलों से गुजरते हुए सोमवार को गाजियाबाद तक पहुंच गए. लेकिन यहां से इन किसानों को आगे बढ़ने नहीं दिया गया.

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