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माओवादियों ने अगवा किये दो गार्ड और एक मुंशी को परिजनों की गुहार पर 13 दिन बाद छोड़ा

Palamu/Latehar : झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा से अगवा दो गार्ड और एक मुंशी को भाकपा माओवादियों ने 13 दिनों के बाद मुक्त कर दिया है. नक्सलियों के चंगुल से छूटने के बाद तीनों अपने-अपने घर पहुंचे. इससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है.

विदित हो कि 28 नवंबर को लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र की कुकुदपाठ बॉक्साइट माइंस से माओवादियों ने मुंशी और दो सुरक्षा गार्ड का अपहरण कर लिया था. कुकुदपाठ बॉक्साइट माइंस झारखंड-छत्तीसगढ़ बॉर्डर पर स्थित है. तीनों को गुरुवार देर रात छोड़ा गया. सुरक्षाकर्मी सूरज सोनी और संजय यादव बॉक्साइट माइंस के कांटाघर की सुरक्षा में लगे थे, जबकि मुंशी रामधनी यादव राजेंद्रपुर बॉक्साइट माइंस पर कार्यरत थे.

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परिजनों ने माओवादियों से की थी छोड़ने की अपील

तीनों को छुड़ाने के लिए परिजनों के साथ-साथ झारखंड और छत्तीसगढ़ की पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी, लेकिन पुलिस को इन लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. इधर, लगातार समय गुजरने से अपहृत लोगों के परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही थी. परिजनों ने दो दिन पूर्व माओवादियों से अपील की थी कि उनके परिजनों को सकुशल मुक्त कर दें, क्योंकि वे लोग काफी गरीब परिवार से आते हैं. इसके बाद गुरुवार की देर रात छत्तीसगढ़ की सीमा पर तीनों अपहृतों को माओवादियों ने मुक्त कर दिया.

परिजनों की गुहार पर माओवादियों ने अगवा किये दो गार्ड और एक मुंशी को 13 दिन बाद छोड़ा
अपने परिजनों के साथ सूरज सोनी.

दरअसल, माइंस से लेवी की वसूली को लेकर माओवादियों ने कार्रवाई की थी. जानकारी के अनुसार, माओवादियों ने मुंशी और सुरक्षाकर्मियों को नक्सली पर्चा देकर माइंस के प्रबंधन तक पहुंचाने को कहा था. लेकिन, यह पर्चा पुलिस तक पहुंच गया. इसी से नाराज होकर नक्सलियों ने सुरक्षाकर्मियों और मुंशी के साथ मारपीट की और उन्हें बंधक बनाकर अपने साथ ले गये थे.

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