JharkhandKhuntiRanchi

भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि को अफीम की खेती कर बदनाम कर रहे हैं नक्सली

Ranchi:  झारखण्ड का खूंटी जिला एक ओर भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए जाना जाता है तो दूसरी तरफ नक्सलवाद, उग्रवाद, और अफीम की खेती के लिए बदनाम है. अब इस जिले की नकारात्मक छवि बनने लगी है. नक्सली और अफीम माफिया भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर अफीम की खेती करने को लेकर प्रोत्साहित कर रहे हैं. इसका नतीजा ये है कि खूंटी अफीम की खेती को लेकर बदनाम हो गया है. खूंटी के ग्रामीण इलाकों में पिछले कई सालों से अफीम की अवैध खेती हो रही है. लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नही हुआ जिससे अफीम की खेती पर लगाम लग सके.

खूंटी में अफीम की खेती के खिलाफ अभियान

झारखण्ड की राजधानी रांची से महज कुछ दूरी पर खूंटी जिले में सर्वाधिक अफीम की खेती होती हैं. अफीम तस्कर और नक्सलियों के गठजोड़ से यहां अफीम की खेती होती हैं. अफीम की खेती के लिए स्थानीय लोगों का भी पूरा समर्थन मिलता हैं. बिना स्थानीय लोगों के सहयोग से अफीम की खेती असंभव है. जिले में प्रशासन ने अभियान चला कर पिछले 10 दिनों में करीब सौ एकड़ में लगी अफीम की फसल नष्ट किया हैं. इसके साथ ही अफीम के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी हैं.

इसे भी पढ़ें- हार्स ट्रेडिंग मामले समेत सरकार के निलंबन संबंधित आदेश को निलंबित अधिकारी अनुराग गुप्ता ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

 

पुलिस लगातर चला रही है अभियान

यहां ये बताना भी जरूरी है कि अफीम की फसल के पीछे कोई भी हो लेकिन खेती तो स्थानीय लोग ही करते हैं. इसके साथ ही वे दूसरे फसल में रूचि नहीं रखते हैं. लेकिन कुछ चंद पैसे की लालच में अफीम की खेती कर लेते है. खूंटी पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर ने बताया कि अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है. उन्होंने बताया कि अवैध अफीम के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. उन्होनें कहा कि अफीम के खेत मालिकों का पता लगाकर उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी. एसपी के मुताबिक अफीम की खेती के खिलाफ अभियान चलाने के लिए कई टीमें बनाई गयी हैं, जो अफीम की खेती को चिह्नित कर नष्ट कर रही हैं.

इसे भी पढ़ें- कुख्यात अपराधी सुरेंद्र बंगाली का रिकार्ड गायब होने के मामले पर कोतवाली थाने में दर्ज हुई एफआईआर

Related Articles

Back to top button