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मणिपुर फर्जी मुठभेड़  : केंद्र ने कहा, सुनवाई से पहले जवानों को हत्यारा कहना गलत, दूसरी बेंच को सौंप दें मामला

केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामले में आमने-सामने हैं. केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपी सैन्य अधिकारियों को हत्यारा कहना रास नहीं आया है.

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NewDelhi : केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामले में आमने-सामने हैं. केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपी सैन्य अधिकारियों को हत्यारा कहना रास नहीं आया है. केंद्र सरकार का इस संबंध में कहना है कि सुनवाई से पहले आरोपी जवानों को हत्यारा कहने से गलत संदेश गया है. कहा कि ऐसी टिप्पणियों से सेना का मनोबल गिरता है. कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की इस तरह की टिप्पणी से सेना में पक्षपात का अंदेशा पैदा हो गया है.  ऐसे में केंद्र का मानना है कि न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और यूयू ललित की पीठ को मामले से अलग हो जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मसले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. बता दें कि  सीबीआई जस्टिस लोकुर की पीठ की निगरानी में मणिपुर फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच कर रही है. 30 जुलाई, 2018 को पीठ ने धीमी जांच को लेकर सीबीआई निदेशक से सवाल-जवाब के दौरान तल़्ख टिप्पणी की थी.  कहा था कि हत्यारे इंफाल की सड़कों पर घूम रहे हैं.

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ऐसी टिप्पणी से धारणा बन जाती है कि कोर्ट पक्षपात करेगा.

इसे लेकर केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, ऐसी टिप्पणी से धारणा बन जाती है कि कोर्ट पक्षपात करेगा. मांग की कि पीठ को मामला किसी दूसरी बेंच को सौंप देना चाहिए. इस क्रम में अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा कि सशस्त्र बल विपरीत परिस्थितियों में काम करते हैं. कहा कि विद्रोहियों से अधिक जवान मारे जाते हैं. अटॉर्नी जनरल के अनुसार कोर्ट की इस टिप्पणी के कारण आरोपी सैन्य अधिकारियों को अपने सामने फांसी का फंदा दिख रहा है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद क्या कोई निचली अदालत इस मामले को अलग नजरिये से देख सकती है?

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अगर याची चाहें तो हम स्पष्टीकरण दे सकते हैं : कोर्ट

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और यूयू ललित की पीठ ने केंद्र सरकार के सवाल पर कहा कि टिप्पणी खास संदर्भ में की गयी थी. अगर याची चाहें तो हम स्पष्टीकरण दे सकते हैं. लेकिन अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आरोपी सैन्य अधिकारियों में पक्षपात का डर पैदा हो गया है. इसलिए पीठ को इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए. कर्नल अमित कुमार समेत अन्य सैन्य अफसरों की पैरवी कर रहे वकील मुकुल रोहतगी का कहना था कि कोर्ट के स्पष्टीकरण से पक्षपात की आशंका दूर नहीं होगी. यदि किसी टिप्पणी से निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की आशंका  है तो पीठ को चाहिए. कि वह मामले से अलग हो जाये.

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