Opinion

मूर्खतापूर्ण नीतियों से गड्ढे में जा रहा मेक-इन-इंडिया अभियान

Girish Malviya

मोदी सरकार का मेक-इन-इंडिया अभियान लगातार गड्ढे में जाता जा रहा है. गलत नीतियों की वजह से टीवी निर्माण करने वाली बड़ी कंपनियां भारत से अपनी फैक्टरी एक-एक करके बंद करती जा रही है.

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जापानी कंपनी Sony ने एफटीए रूट के जरिए थाईलैंड से टेलीविजन आयात करना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही भारत में बने कुछ मॉडल्स को मलेशिया भेज दिया है.

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सैमसंग ने तो पिछले साल से ही देश में टीवी बनाना बंद करके वियतनाम से आयात शुरू कर दिया था. गये साल वियतनाम से ही 2,317 करोड़ रुपए के टीवी सेट भारत इंपोर्ट किये गये, जबकि इसके पिछले साल वियतनाम से सिर्फ 62 करोड़ रुपए के टीवी सेट का आयात किया गया था.

दरअसल इसके पीछे वजह है टीवी के ओपन सेल पैनल के आयात पर लगने वाली 5 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी. इस बजट में इस इंपोर्ट ड्यूटी को कम नहीं किए जाने के बाद कंपनियां उन देशों में टीवी निर्माण करने की योजना बना रही हैं, जो भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में हैं.

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वहां से टीवी आयात करने पर इन कंपनियों को कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं देनी होगी. इसके चलते कंपनियां 5 फीसदी की बचत कर सकेंगी. इसलिए बची-खुची सभी कंपनियां देश में टीवी निर्माण बंद करने की तैयारी में हैं.

ये कंपनियां टीवी के ओपन सेल पैनल आयात करने के बजाय अब सीधा टीवी का ही आयात करेंगे. देश का टीवी बाजार तकरीबन 22 हजार करोड़ रुपए का है.

देश में उत्पादन करने वाली यह टीवी कंपनियां यदि उत्पादन बंद करके विदेश का रुख कर रही है, तो यहां जो लोग उनकी फैक्ट्री में काम कर रहे हैं वह सब बेरोजगार होने की कगार पर खड़े हुए हैं. सरकार एक ओर तो रोजगार दे नहीं पा रही है बल्कि अपनी मूर्खतापूर्ण नीतियों से जो फैक्ट्री चल रही है वो भी बंद करा रही है.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनकी निजी राय है.)

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Nayika

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