
Sanjay
Bermo: कोरोना को लेकर हुए लॉकडाउन का असर पब्लिक सेक्टर की कंपनी पर भी पड़ रहा है. इसका असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है. डीवीसी के बोकारो थर्मल स्थित 500 मेगावाट के पावर प्लांट सहित डीवीसी के अन्य स्थानों के पावर प्लांटों पर भी असर देखने को मिल रहा है.
डीवीसी के मीजिया,कोडरमा,बोकारो थर्मल,रघुनाथपुर आदि के पावर प्लांटों की यूनिटों से उत्पादित बिजली की मांग नहीं रहने के कारण यूनिटों को बंद कर रखा जा रहा है. जिन यूनिटों से उत्पादन हो रहा है, वहां भी उत्पादन क्षमता से आधा ही उत्पादन किया जा रहा है.
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बोकारो थर्मल पावर प्लांट में चार दिनों से ठप है उत्पादन
बोकारो थर्मल स्थित 500 मेगावाट के पावर प्लांट से 5 मई से टयूबलीकेज के कारण बिजली का उत्पादन ठप है. शुक्रवार को टयूबलीकेज की मरम्मत का काम कर लिया गया है. संभवतः शनिवार यानी आज से पावर प्लांट को फिर से लाईटअप किया जाएगा. लॉकडाउन के कारण बिजली की मांग कम होने के कारण 500 मेगावाट के पावर प्लांट को कम लोड 250 से 300 मेगावाट पर चलाया जा रहा है.
नौ माह से बंद है बी पावर प्लांट की तीन नंबर यूनिट
630 मेगावाट के बी पावर प्लांट की 210 मेगावाट क्षमता वाली तीन नबर यूनिट को नौ माह से बंद कर रखा गया है. तीन नंबर यूनिट को 7 सितंबर 2019 से बंद किया गया है. बी पावर प्लांट के एक एवं दो नंबर यूनिट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. शुक्रवार को डीवीसी मुख्यालय के निर्देश पर तीन नंबर यूनिट को लाईटअप करने को लेकर स्थानीय प्रबंधन के द्वारा सारी तैयारी कर ली गयी है. मुख्यालय ने यूनिट को चालू करने के निर्देश स्थानीय प्रबंधन को दिये हैं.
पावर प्लांट के समक्ष राख फेंकने की विकट समस्या
बोकारो थर्मल पावर प्लांट के समक्ष सबसे बड़ी समस्या इसके राख को लेकर है. सीसीएल के बंद खदानों में राख फेंकने पर रोक के बाद से विगत डेढ़ वर्ष से समस्या बनी हुई है. स्थानीय ऐश पौंड से राख का उठाव नहीं होने के कारण ही विगत 12 सितंबर 2019 को एक नंबर पौंड टूट गया था.

पौंड की मरम्मत करने में प्रबंधन को छह माह से भी ज्यादा का समय लग गया. पौंड निर्माण के काम में बरती गयी लापरवाही के कारण पौंड में अप्रैल माह में फिर से दरार आने पर प्लांट को एक सप्ताह से भी ज्यादा समय के लिए बंद कर रखा गया था. प्रबंधन के द्वारा कोनार डैम में एक वर्ष से राख को फेंका जा रहा था.
लेकिन वर्तमान में राख को बगोदर के समीप बन रहे एनएच दो के काम के लिए ले जाया जा रहा है.राख उठाव के काम में कम वाहनों के लगाने, लंबी दूरी के कारण राख के उठाव में दिक्कतें हो रही हैं. पावर प्लांट से बिजली उत्पादन के समय ढाई से तीन हजार एमटी राख पौंड में जमा होती है जबकि लगभग इतनी ही राख का उठाव भी होता है.
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दो दिनों से बंद है राख का उठाव
डीवीसी के ऐश पौंड से पिछले दो दिनों से राख का उठाव बंद है. राख उठाने के काम में लगे वाहनों के मालिकों के द्वारा भाड़ा बढ़ाने की मांग तथा बाहरी वाहनों को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय वाहन चालकों एवं मालिकों के द्वारा राख उठाव के काम को बंद कर रखा गया है.
लॉकडाउन के कारण मांग में कमी
कोरोना संक्रमण पर रोक लगाने के लिए लगे लॉकडाउन के कारण ज्यादातर कल-कारखाने एवं उद्योग-धंधे बंद हैं. औद्योगिक संस्थानों के बंद रहने के कारण बिजली की मांग नहीं हो रही है. जिसके कारण डीवीसी के मीजिया,कोडरमा,बोकारो थर्मल,रघुनाथपुर आदि के पावर प्लांटों की यूनिटों को मांग नहीं रहने के कारण बंद कर रखा जा रहा है.
जिन यूनिटों से उत्पादन हो रहा है उससे भी उत्पादन क्षमता से आधा उत्पादन किया जा रहा है. डीवीसी से उत्पादित बिजली के सबसे बड़े खरीददार रेल, सेल जैसे संस्थान हैं. लॉकडाउन के कारण रेलवे का परिचालन ठप रहने से मांग में कमी आयी है. डीवीसी के उत्पादित बिजली की खपत सिर्फ डॉमेस्टिक उपयोग में ही हो रही है.
मंत्रालय के हस्तक्षेप से ही निकलेगा स्थायी समाधान
डीवीसी के आधिकारिक सूत्रों की मानें, तो केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के हस्तक्षेप से ही डीवीसी बोकारो थर्मल एवं चंद्रपुरा पावर प्लांट को राख फेंकने की समस्या का स्थायी समाधान मिल सकता है. सूत्रों का कहना है कि कोयला एवं ऊर्जा मंत्रालय केंद्र सरकार के पास ही है. मंत्रालय कोल इंडिया को निर्देश दे ताकि उसके बंद खाली खदानों को पावर प्लांट की राख फेंकने के काम में लाया जा सके.
बंद करना पड़ सकता है पावर प्लांट
बोकारो थर्मल के सीई टी अकबर का कहना है कि स्थानीय पावर प्लांट के समक्ष सबसे बड़ी समस्या पौंड में जमा राख को फेंकने को लेकर है. कहा कि राख फेंकने का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो बरसात के समय पावर प्लांट को बंद कर देना पड़ेगा. साथ ही कहा कि वर्तमान में लॉकडाउन के कारण बिजली की मांग कम होने से यूनिटों को बंद कर रखा जा रहा है,जो यूनिटें से उत्पादन हो रहा है उसे भी कम लोड पर ही चलाया जा रहा है.




