
New Delhi: लोकसभी चुनाव में जनता को लुभाने के लिए नेता हर जोर-आजमाइश लगा रहे हैं. वहीं चुनाव में सेना के राजनीतिक इस्तेमाल से देश के पूर्व सेना प्रमुख नाराज हैं.
चुनाव प्रचार के दौरान सेना और सैनिकों की वर्दी का इस्तेमाल करने पर कई सैन्य अधिकारियों ने आपत्ति जताई है. इन सभी अधिकारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पूरे मामले को लेकर चिट्ठी लिखी है.
सैन्य ऑपरेशन का ना हो राजनीतिकरण
पूर्व सैन्य प्रमुख ने कहा है कि राष्ट्रपति (तीनों सेनाओं के प्रमुख) सभी राजनीतिक दलों को किसी भी मिलिट्री एक्शन या ऑपरेशन का राजनीतिकरण नहीं करने के लिए निर्देश दें.
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राष्ट्रपति के साथ-साथ ये चिट्ठी चुनाव आयोग को भी भेजी गयी है. चिट्ठी लिखने वालों में 156 सैनिक शामिल हैं. पूर्व सेनाध्यक्षों की यह अपील गुरुवार को पहले चरण के मतदान के घंटों बाद सार्वजनिक हो गई.
द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में कहा गया है, “महोदय, राजनेता सीमा पार कार्रवाइयों जैसे मिलिट्री ऑपरेशंस का क्रेडिट ले रहे हैं और इससे भी दो कदम आगे जाते हुए देश की सेना को ‘मोदी जी की सेना’ करार दे रहे हैं, यह बिल्कुल ही असामान्य और अस्वीकार्य है.”
सेना के नाम पर वोट अपील
हालांकि, इस पत्र में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं है. लेकिन चुनाव आयोग ने पहले ही सेना के नाम पर वोट मांगने को लेकर सख्ती दिखाई थी. और सेना से जुड़े बैनर, पोस्टर के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी.
वहीं कुछ दिन पहले ही पीएम मोदी ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट करने की अपील की थी.
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महाराष्ट्र के लातूर के औसा में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था, ‘आप हवाई हमला करने वालों को अपना पहला वोट समर्पित कर सकते हैं क्या.’’
इससे पहले हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभा में भारतीय सेना को ‘मोदी जी की सेना’ कहकर संबोधित किया था. उनके साथ ही मुख्तार अब्बास नकवी ने भी ऐसा ही बयान दिया था.
वहीं दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी भी एक रैली में सेना की वर्दी में नजर आए थे. जिसपर विपक्ष ने आपत्ति जताई थी.
ज्ञात हो कि इससे पहले देश के 66 पूर्व नौकरशाहों ने भी लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा था. जिसमें निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाये गये थे.
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