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पलामू : 70 साल में एक बांध का भी नहीं हुआ निर्माण, ग्रामीण करेंगे वोट बहिष्कार

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Dilip Kumar

Palamu : पलामू लोकसभा क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का घोर अभाव है. जनसरोकार से जुड़ी समस्याओं का मकड़जाड फैला है. ऐसे में कई ऐसे इलाके हैं, जहां इस संसदीय चुनाव में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया गया है.

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मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 17 में सड़क का अभाव रहने पर स्थानीय लोगों ने वोट नहीं देने का मन बनाया है, वहीं जिले के हैदरनगर प्रखंड अंतर्गत परता गांव के ग्रामीणों ने 70 वर्ष में एक बांध का निर्माण नहीं होने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत केंद्र एवं राज्य के अधिकारियों को पत्र लिखकर वोट का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है.

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बांध बनने से 500 एकड़ भूमि होती सिंचित

ग्रामीणों द्वारा पत्र में लिखा गया है कि सदाबह नदी, जिसे मुरही नाला के नाम से जाना जाता है. उक्त नदी पर मुकम्मल बांध का निर्माण होने से करीब 500 एकड़ भूमि में सिंचाई हो सकती थी. लेकिन अब तक उक्त स्थल पर बांध के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी. छोटा बांध बनाया जाता है, जो पानी के दबाव में टूट जाता है. दर्जनों बार ग्रामीणों ने चंदा कर व श्रमदान कर बांध का निर्माण कराया.

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सांसद का प्रयास फाइलों में घूमता रहा

वर्तमान सांसद वीडी राम को भी मुरही नाला पर बांध निर्माण के लिए पत्र दिया गया था. सांसद का आदेश इस कार्यालय से उस कार्यालय घूमता रहा. अब तक कुछ भी नहीं हो सका है. पंचायत स्तर से उक्त बांध को बनाना असंभव है.

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बावजूद इसकी फर्जी ग्राम सभा कर बांध निर्माण का प्रस्ताव लिया गया. इस संबंध में मुख्यमंत्री समेत विभिन्न अधिकारियों को ग्रामीणों ने पत्र लिखा है. लेकिन इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

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उम्मीद खत्म होने पर वोट बहिष्कार का निर्णय

ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें वर्तमान सरकार से काफी उम्मीद थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस सरकार में जनता की आवाज सुनी जायेगी. लेकिन यहां से भी निराशा ही हाथ लगी. उन्होंने लिखा है कि अब जनता विश्वास किस पर करे और क्यों करें?  इसलिए उन्होंने वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है. जिसकी पूरी जवाबदेही जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की है.

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पत्र पर इन ग्रामीणों का हस्ताक्षर

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में विश्वनाथ पांडेय, शंकर पाठक, नरसिंह देव पांडेय, रमेश पांडेय, यश दुबे, सोना देवी, मोहित कुमार पांडेय, बालमिकी पांडेय, सुशील कुमार पांडेय, अजीत पासवान, कृष्णकांत पांडेय समेत 56 ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं.

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