
jio ने वादा किया था कॉलिंग फ्री. सिर्फ डाटा के पैसे लगेंगे. मतलब बात करने के पैसे नहीं लगेंगे. सिर्फ इंटरनेट इस्तेमाल करने के पैसे लगेंगे. जियो ने अब कॉलिंग के लिए छह पैसे प्रति मिनट लेना शुरु कर दिया है.
इसे भी पढ़ेंः#JioCustomers फ्री वॉइस कॉल नहीं कर पायेंगे, 6 पैसे प्रति मिनट चार्ज देना होगा
करोड़ों ग्राहक ठगा महसूस कर रहे हैं. “कर लो दुनिया मुट्ठी में” की तरह इस बार भी करोड़ों ग्राहकों को लग रहा है कि वह ठगी के शिकार हुए. लोग सोशल मीडिया पर बातें कर रहे हैं. हम यहां अपूर्व भारद्वाज के फेसबुक वॉल से उनकी बातों को प्रकाशित कर रहे हैं.
आओ सुनाऊं तुमको “जियो” की कहानी…
बहुत साल पहले अक्षय कुमार की एक फ़िल्म आई थी जिसमें उनका तकिया कलाम था “एवेर्थिंग वास प्लांड” मतलब सबकुछ पहले से ही तय था “जियो” की कहानी भी कुछ इसी तरह की है. मैं टेलिकॉम सेक्टर काम कर चुका हूं तो इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि रिलायंस किस तरह काम करता है.
उसके बिजनेस मॉडल को नहीं जानने वाले आज जियो के कॉल रेट बढने पर जो स्यापा कर रहे हैं वो टेल्को (टेलिकॉम कम्पनियों) को काम करने के तरीक़े को जब जान जाएंगे तो जियो के कॉल रेट हाई करने को भी समझ जायेंगे.
बात 2010 की है जब भारत में 4G क्या 2G नेटवर्क भी रोते-गाते चलता था. रिलायंस मेरी कंपनी का मुख्य क्लाइंट था. मैं अपने नए प्रोडक्ट को लेकर रिलायंस के बड़े अधिकारी से मीटिंग करने जा रहा था, तब रिलायंस टेलिकॉम अनिल अंबानी के ग्रुप का हिस्सा था.
इसे भी पढ़ेंः#TRAI ने इंटरकनेक्ट यूजेज चार्ज 58 फीसदी घटाकर जियो को पहुंचाया फायदा
मेरे उस अधिकारी से बड़े अच्छे संबध थे तो मैंने उनसे पूछ लिया कि भारत में टेलिकॉम क्रांति तो आपने कर दी है आगे क्या प्लान है तो वो बोले एवेर्थिंग इज प्लांड !!! आप मुझे 2G के प्रोडक्ट् का डेमो दे रहे हैं उधर मुकेश भाई एलटीई की पूरी प्लानिंग कर चुके है. मैं बिलकुल चौक गया औऱ आगे उन्होंने जो बताया वो आज की हकीकत है.
तो अब आगे की कथा सुनाता हूं, अधिकारी बोले यह 2G, का आखिरी साल है. अब 3G आएगा फिर 2-3 साल बाद 4G स्पेक्ट्रम आयेगा.
भारत में टेलिकॉम क्रांति के बाद मोबाइल डाटा क्रांति रिलायंस ही लाएगा. सबसे पहले अपने तेल साम्राज्य के बदौलत हम 4G स्पेक्ट्रम हासिल करेंगे फिर फ्री डाटा बाटेंगे, पूरे देश को इंटरनेट का आदि बना देंगे. इस तरह यूजर्स की संख्या बढ़ाकर पूरे मार्केट के सबसे बड़े प्लेयर बनेंगे.
एक परिवार एक ऑपरेटर की थीम लेकर चलेंगे और देश के हर परिवार के एक सदस्य को टारगेट करेंगे और 2015 तक अन्य देशों की तरह भारत में भी पोर्टबिलिटी आ जायेगी तब न्यूनतम फीस रखकर दूसरे यूजर्स को टारगेट करेंगे.
फिर जब सबसे ज्यादा मार्केट शेयर होगा और मार्केट में मोनोपॉली हो जायेगी, फिर कॉल के साथ हर सर्विसेज का चार्ज लगेगा और यूजर के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा.
यह कहानी बिलकुल वैसी है जैसे 2000 की शुरुआत में वायरलेस इन लोकल लूप (WLL) की पतली गली का उपयोग करके रिलायंस ने 500 रु में मोबाइल फोन बांटे थे. और भारत के यूजर को सस्ते कॉल और फ्री रोमिंग की सुविधा का लालच देकर जबरदस्त मुनाफा काटा था.
रिलायंस का बिजनेस मॉडल बहुत सरल है. मार्केट के जमने से पहले मार्केट बनाओ, उस प्रोडक्ट का एक बड़ा यूजर बेस खड़ा करो और सही समय पर अच्छा मुनाफा काटकर उस प्रोडक्ट के मरने से पहले किसी और अच्छे दाम में बेचकर उस जगह से निकल जाओ.
मुकेश भाई के पिता धीरू भाई भारत की जनता की दुखती नस को पहचानते थे कि भारत की जनता को सब कुछ फ्री में चाहिये. इसलिए धीरूभाई ने अपने बच्चों को एक बात सिखायी थी इस दुनिया में कुछ भी फ्री नहीं मिलता है. सब चीज बिकाऊ है.
सबकी एक कीमत होती है. बस उसको कैसे वसूलना है उसकी पूरी प्लांनिग होनी चाहिए इसी को बिजनेस कहते है. मुकेश भाई ने आज अपने पिता के सिखाये गुरुमंत्र एक बार फिर सिद्ध कर दिया है, एवेर्थिंग इज पॉसिबल इफ एवेर्थिंग इज प्लांड.
अपूर्व भारद्वाज के फेसबुक वॉल से साभार
इसे भी पढ़ेंःसुस्ती या मंदीः आखिर किसके मुहाने पर खड़ी है भारतीय अर्थव्यवस्था




