
Dhanbad: झारखंड में इन दिनों सूबे के मुखिया सहित मंत्री, विधायक और सांसद के दबाब में काम कर रही है पुलिस. पुलिस कानून के सम्मत कार्रवाई करने में पीछे रह जाती है, इसका कारण ऊपर से दबाव होता है. यहां कानून का राज नहीं है. इसका सीधा मतलब है कि झारखंड की सरकार का ध्यान झारखंडियों पर नहीं है. झारखंड सरकार चंद कॉरपोरेट घरानों के हितों का ही ख्याल रख रही है. ये बातें मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री सह झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में कही.
चरमराई हुई है स्वास्थ्य व्यवस्था
राज्य की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सूबे के इतने बड़े मेडिकल कॉलेज पीएमसीएच में एडहॉक बेसिस या आउटसोर्सिंग पर बहाली नहीं होनी चाहिए. स्थाई नियुक्तियां होनी चाहिए. लगभग 400 संविदा कर्मी एक साथ हड़ताल पर चले गए हैं. उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिला है. और जिन लोगों को वेतन नहीं मिलेगा वो ठीक से काम कैसे कर सकते हैं. ऐसे में समझा जा सकता है कि झारखंड के सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या है.
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जेवीएम सुप्रीमो ने स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सबसे अहम बात यह कि झारखंड की गिनती ही बीमारु प्रदेशों में की जाती है. बीमारू प्रदेश होने के नाते यहां के गरीब-गुरबा जनता निजी अस्पतालों में जाकर महंगी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं ले सकती हैं. ऐसे में सरकार को सरकारी अस्पतालों में तमाम सुविधाएं मुकम्मल करानी चाहिए. तमाम नियुक्तियां स्थाई किए जाने चाहिए ताकि लोग मन लगाकर काम कर सकें और लोगों का सही तरीके से इलाज हो सके.
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