
Vivek Sharma
Ranchi: राजधानी में सिवरेज ड्रेनेज का काम जब शुरू हुआ तो लगा कि अब लोगों को गंदगी और बजबजाती नालियों से छुटकारा मिल जाएगा. वहीं अब कहीं भी खुले नाले दिखाई नहीं देंगे. इसका काम भी शुरू हुआ और अबतक करोड़ों रुपए भी खर्च हो गए. लेकिन शहर की स्थिति चलने लायक भी नहीं हुई. आज स्थिति यह है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी फर्स्ट फेज का मात्र 37 परसेंट काम हुआ है, जिससे वाटर लॉगिंग के अलावा बजबजाती नालियां ही नजर आ रही है. अब बचे हुए 63 परसेंट काम के लिए जुडको ने विज्ञापन निकाला है, जिसमें रिवाइज्ड डीपीआर तैयार करने के साथ ही काम पूरा करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसियों को आमंत्रित किया गया है. अब देखना यह होगा कि इस बार भी एजेंसी सिवरेज-ड्रेनेज के जोन वन का काम पूरा कर पाती है या नहीं.
इंदौर 300 करोड़ खर्च कर बना नंबर वन
इंदौर शहर ने 300 करोड़ रुपए खर्च कर सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त कर लिया है. वहीं पानी के ट्रीटमेंट कर उसे भी इस्तेमाल के लायक बनाया जा रहा है. लेकिन रांची में अबतक 85 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद चलने लायक भी काम नहीं हो पाया है तो टॉप लिस्ट में आना दूर की बात है.
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357 करोड़ में पूरा करना था प्रोजेक्ट
जलजमाव और नालियों की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए सीवरेज ड्रेनेज योजना पर करोड़ों रुपए फूंक दिए गए. जोन-1 में रांची नगर निगम के 9 वार्डों में काम होना था. इसके लिए 357 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई गई थी. लेकिन चार सालों में 85 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है. वहीं बार-बार एजेंसी बदलने के चक्कर में खर्च भी बढ़ने की उम्मीद है. 357 करोड़ रुपए में लखनऊ की कंपनी ज्योति बिल्डटेक को यह ठेका दिया गया था. अब अधूरे प्रोजेक्ट का नए सिरे से काम कराने पर 350 करोड़ से अधिक खर्च होंगे.
2006 से चल रहा काम, फिर भी अधूरा
2006 में सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के डीपीआर का जिम्मा कंसल्टेंट कंपनी मैनहर्ट को दिया गया था. बाद में मैनहर्ट कंपनी ने सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को चार फेज में पूरा करने को लेकर डीपीआर बनाया. इन चारों फेज के लिए मैनहर्ट 1200 करोड़ रुपए का खर्च बताया. जहां फर्स्ट फेज के काम के लिए ज्योति बिल्टडेक कंपनी का सेलेक्शन किया गया. इसके लिए कुल 357 करोड़ खर्च करने की बात कही गई थी.
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चार जोन में बांटी गई है राजधानी
राजधानी को चार जोन में बांटकर सीवरेज-ड्रेनेज प्रोजेक्ट का डीपीआर बनाया गया था. जोन-1 में काम शुरू हुआ था. पिछली सरकार ने अन्य तीन जोन में भी सीवरेज-ड्रेनेज बनाने की योजना बनाई थी. सरकार बदलने के साथ योजनाएं फाइलों में बंद हो गई. अब फिर से सिवरेज ड्रेनेज का काम पूरा करने के लिए सरकार की नींद खुली है. पिछले साल भी पीएमसी (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट) के सेलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. लेकिन बीच में ही यह योजना अटक गई.
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