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जानें वीर शहीद विजय सोरेंग की पूरी कहानी

  • पिता खुद बीएसएफ रिटायर्ड, बेटे को भेजा सीआरपीएफ में

Ranchi/Gumla : आंखों में नमी, फिर भी कह रहे हैं, “गर्व है मुझे अपने बेटे पर, जो देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ. बेटे की वीरता से मेरी छाती चौड़ी होकर छप्पन इंच की हो गयी.” यह कहना है पुलवामा में शहीद हुए गुमला निवासी विजय सोरेंग के पिता बृज सोरेंग का, जो खुद बीएसएफ से रिटायर्ड हैं और अब उनके बेटे विजय सोरेंग ने देश के लिए अपनी जान दे दी. बसिया (गुमला) के फरसमा गांव निवासी विजय सोरेंग एक फरवरी को छुट्टी पर घर आये थे. इसके बाद वह आठ फरवरी को ड्यूटी पर वापस गये, लेकिन किसी को नहीं पता था कि अब उनका सिर्फ पार्थिव शरीर ही घर वापस आयेगा.

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शहीद विजय सोरेंग का फाइल फोटो.

मां बोलीं- बेटे की शहादत पर गर्व है

शहीद विजय सोरेंग के पिता खुद बीएसएफ से रिटायर्ड हैं. बीएसएफ में रहते हुए उन्होंने सेना के कई उतार-चढ़ाव को देखा. इसके बाद भी उन्होंने अपने बेटे विजय सोरेंग को सेना में भर्ती कराया. वहीं, शहीद विजय सोरेंग की मां लक्ष्मी सोरेंग का रो-रोकर बुरा हाल है, फिर भी वह कह रही हैं कि बेटे की शहादत पर गर्व है, लेकिन बेटा खोने का दुःख भी है. शहीद का एक भाई संजय सोरेंग हैं.

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परिजन.

पत्नी है जैप की महिला बटालियन में

शहीद विजय सोरेंग की पत्नी करमेला बा जैप की महिला बटालियन में कार्यरत है. वह रांची में पदस्थापित हैं. विजय सोरेंग और करमेला बा के दो बेटे और दो बेटियां हैं. बेटी बरखा सोरेन (12 साल), रेखा सोरेन (14 साल), बेटा अरुण सोरेंग (26 साल) और राहुल सोरेंग (नौ साल) हैं.

शनिवार सुबह घर पहुंचाया जायेगा पार्थिव शरीर

शहीद का पार्थिव शरीर शुक्रवार की रात रांची आयेगा, जिसके बाद गुमला स्थित बसिया के फरसमा गांव शनिवार सुबह पहुंचाया जायेगा.

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