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किसान आंदोलन: केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच 8वें दौर की वार्ता आज , ट्रैक्टर रैली निकालकर बनाया था दबाव

New delhi: कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों का धरना 44वें दिन भी लगातार जारी है. कल किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाल कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. आज  सरकार और कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के बीच आठवें दौर की वार्ता होगी. कहा जा रहा है कि आठवें दौर की वार्ता में सरकार की ओर से कुछ नए प्रस्ताव पेश किए जा सकते हैं. ऐसे में देश भर के किसानों के साथ ही केंद्र सरकार भी विज्ञान भवन में होने वाली इस बैठक का इंतजार कर रही है. उम्मीद की जा रही है कि इस वार्ता में सरकार की तरफ से किसानों के सामने नया फार्मूला पेश किया जा सकता है. किसान कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. वहीं केंद्र ने इस बात पर जोर दिया है कि इन कानूनों को वापस लेने के अलावा वो हर प्रस्ताव पर विचार के लिए तैयार है.

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अफवाहों का बाजार भी है गरम

किसान आंदोलन का बीच अफवाहों का बाजार भी गरम है. यह भी सुनने को मिल रहा है कि कुछ राज्यों को केंद्रीय कृषि कानूनों के दायरे से बाहर निकलने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन किसान संगठनों ने कहा कि उन्हें सरकार से इस प्रकार का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. वहीं इन अफवाहों पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस प्रकार का कोई प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है.

मैं सबसे मिलूंगा चाहे वे किसान हों या नेता- तोमर

वार्ता के बारे में पूछने पर कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि मैं उनसे (बाबा लखा से) बात करना जारी रखूंगा. वह आज दिल्ली आए हैं, यह खबर बन गयी. मेरा उनसे पुराना संबंध है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थता करने वाले सभी नेताओं मिलने को तैयार हूं. इसके बाद उन्होंने ये साफ किया कि सरकार किसी भी तरह इस प्रदर्शन को खत्म करवाने के लिए तैयार है.

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विज्ञान भवन में 2 बजे होगी आठवें दौर की वार्ता

किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 8 वें दौर की वार्ता आज विज्ञान भवन में 2 बजे होगी.  इस वार्ता में तोमर, खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश के साथ ही 40 प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के होने की उम्मीद है. इससे पहले चार जनवरी को हुई बैठक के बेनतीजा रहने के बाद यह बैठक अहम है. सरकार ने 30 दिसंबर 2020 को छठे दौर की वार्ता में किसानों की बिजली सब्सिडी और पराली जलाने संबंधी दो मांगों को मान लिया था. इससे पहले की किसी वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली थी.

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